ईमानदार करदाताओं को सहूलियत, जानबूझकर चोरी पर सख्ती करें आयकर अधिकारी: सीतारमण

ईमानदार करदाताओं को सहूलियत, जानबूझकर चोरी पर सख्ती करें आयकर अधिकारी: सीतारमण

ईमानदार करदाताओं को सहूलियत, जानबूझकर चोरी पर सख्ती करें आयकर अधिकारी: सीतारमण
Modified Date: July 24, 2026 / 09:46 pm IST
Published Date: July 24, 2026 9:46 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आयकर विभाग के अधिकारियों से ईमानदार करदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने और जानबूझकर कर चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा।

इसके साथ ही सीतारमण ने उत्तरदायी कर प्रशासन के लिए पहचान, प्रतिक्रिया, निवारण, समीक्षा और सुधार रूपी पांच प्राथमिकताओं पर विशेष जोर दिया।

वित्त मंत्री ने 167वें आयकर दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि विभाग की भूमिका अब केवल ‘कर संग्रह’ तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें पारदर्शिता, दक्षता, व्यापार सुगमता और सेवा भाव भी शामिल हो गया है।

उन्होंने कहा “डेढ़ सदी से अधिक समय में आयकर विभाग भारत के आर्थिक रूपांतरण के साथ विकसित हुआ है और देश की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को लगातार ढालता रहा है।”

सीतारमण ने कहा कि आयकर अधिनियम, 2025 के लागू होने से कानून को सरल बनाया गया है, अनिश्चितता कम हुई है और अनुपालन लागत घटी है। साथ ही, ई-फाइलिंग पोर्टल की क्षमता बढ़ने से इस बार आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की प्रक्रिया और मजबूत हुई है।

उन्होंने बताया कि एक दिन में एक करोड़ से अधिक करदाताओं को संभाला गया जबकि व्यस्त समय में यह संख्या 1.6 करोड़ तक पहुंच गई।

आईटीआर दाखिल करने के मौजूदा सत्र में 21 जुलाई तक 3.2 करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से करीब 94 प्रतिशत का सत्यापन और 60 प्रतिशत का निपटान किया जा चुका है।

इसके अलावा 1.3 करोड़ से अधिक कर रिफंड दावे किए गए, जिनमें 96 प्रतिशत को सत्यापित और 40 प्रतिशत को निपटाया जा चुका है।

सीतारमण ने कहा कि रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने से करदाताओं का भरोसा बढ़ता है और उनकी नकदी स्थिति मजबूत होती है।

उन्होंने कहा, “हमारा दृष्टिकोण ऐसा होना चाहिए जिसमें ईमानदार करदाताओं को सुविधा मिले, वास्तविक त्रुटियों को सुधारने का अवसर दिया जाए और जानबूझकर कर चोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो।”

वित्त मंत्री ने आयकर अधिकारियों से कहा कि कर कानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग हमेशा विनम्रता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि करदाता केवल कर आकलन का विषय न होकर देश का नागरिक और देश के विकास का साझेदार भी है।

उन्होंने कर विवादों को कम करने और कर निश्चितता बढ़ाने पर भी जोर दिया। “कर निश्चितता स्वैच्छिक अनुपालन की मजबूत नींव है। हमें ‘विवाद प्रबंधन’ से आगे बढ़कर ‘विवाद रोकथाम’ की दिशा में काम करना होगा।”

इस मौके पर राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में 2.24 लाख अपीलों का निपटान किया गया, जो एक साल पहले से 30 प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने कहा कि विभाग ने स्पष्ट विधायी मसौदा तैयार करने, प्रक्रियागत नियमों को सरल बनाने, प्रौद्योगिकी के अधिक उपयोग और प्रक्रियाओं के मानकीकरण के जरिए अस्पष्टता और विवादों को कम करने के प्रयास किए हैं।

श्रीवास्तव ने कहा, “इन उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि राजस्व की सुरक्षा के साथ कर विवादों का तेजी और अधिक दक्षता से निपटान किया जा सके।”

वहीं, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि शिकायतों के समाधान में भी सुधार हुआ है और समय में काफी कमी आई है।

उन्होंने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में विभाग ने केंद्रीकृत जन शिकायत निपटान और निगरानी प्रणाली (सीपीग्राम्स) के तहत 77,765 शिकायतों में से 72,933 शिकायतों का समाधान कर दिया। इसके साथ, ई-निवारण के तहत आई कुल 3,43,269 शिकायतों में 95 प्रतिशत को निपटाया गया।

उन्होंने कहा कि विभाग अब बार-बार आने वाली शिकायतों के मूल कारणों को दूर करने पर भी काम कर रहा है, ताकि करदाताओं को शुरुआत में ही कम समस्याओं का सामना करना पड़े।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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