जयपुर, सात अप्रैल (भाषा) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खाद्य सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए मंगलवार को देश की संपूर्ण खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने फसलों का उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने और किसानों के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
वह यहां पश्चिमी राज्यों के लिए क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। चौहान ने कहा, ‘‘देश की खाद्य सुरक्षा हमको सुनिश्चित करनी है। 140 करोड़ भारतीय हैं उनके लिए पर्याप्त खाद्यान्न चाहिए। उनके लिए अनाज, फल, सब्जियां, तिलहन, दलहन व दूध भी…सब चाहिए।’’
उन्होंने कहा,‘‘… क्योंकि आज के युग में हम किसी पर भी निर्भर नहीं रह सकते। प्रधानमंत्री का संकल्प है आत्मनिर्भर भारत। आज तो दुनिया की परिस्थितियां ऐसी हैं कि भोजन के लिए निर्भरता कदापि मंजूर नहीं है। हमें आत्मनिर्भर होना चाहिए।’’
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि मुझको खुशी है कि गेहूं हो, चावल हो ..अन्न के तो हमारे भंडार भरे हैं। हालत यह है कि गेहूं व चावल में तो हमें विचार यह करना पड़ता है कि उसे रखे कहां? रखने की जगह नहीं है। तो हमने प्रगति बहुत की है लेकिन दलहन की कमी है। इसका हमें आयात करना पड़ता है। तेल का भी आयात करना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो दलहन में भी हमको आत्मनिर्भर होना है। तिलहन में भी आत्मनिर्भर होना है। कोई भी चीज ऐसी न हो जो हमें बाहर से मंगानी हो। संपूर्ण खाद्य सुरक्षा हमको सुनिश्चित करनी है।’’
उन्होंने कहा कि भारत अपनी आवश्यकता अपने किसानों से अपने देश में पूरी करेगा और केवल इतना ही नहीं प्रधानमंत्री का कहना है कि भारत विश्वबंधु भी है इसलिए हम दुनिया की जरूरत को पूरा करेंगे। कोरोना के समय में भी हमने पूरा किया और अब संकट के समय भी भारत दुनिया को खाद्यान्न आपूर्ति की क्षमता रखता है।
किसानों की आय बढ़ाने की बात करते हुए चौहान ने कहा, ‘‘किसानों की आय बढ़ानी है, उनके जीवन स्तर को उठाना है और उनकी जिंदगी को भी आसान बनाना है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसान उसकी आत्मा है। कृषि मंत्री के नाते मैं मानता हूं कि किसानों की सेवा हमारे लिए भगवान की पूजा है। किसानों की आय हम कैसे बढ़ा सकें इस दिशा में हमें कदम उठाने हैं।’’
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों की आय बढ़ाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी को स्वस्थ रखने को कृषि के विविधीकरण, नई वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाने और प्राकृतिक खेती की आवश्यकता है।
चौहान ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी की घटती उर्वरता पर चिंता व्यक्त की, और आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखने को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
नए बजट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यों को उन योजनाओं के लिए अधिक धनराशि आवंटित करने की छूट दी गई है, जो उनके अपने क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस सम्मेलन में राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री और अधिकारी, प्रगतिशील किसान और कृषि विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
भाषा पृथ्वी मनीषा अजय
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