मजबूत विनिर्माण प्रदर्शन से देश का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में आठ प्रतिशत बढ़ा
मजबूत विनिर्माण प्रदर्शन से देश का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में आठ प्रतिशत बढ़ा
नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) विनिर्माण और बिजली क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन से देश का औद्योगिक उत्पादन अगस्त में सालाना आधार पर आठ प्रतिशत बढ़ गया। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन अगस्त में नौ प्रतिशत बढ़ा, जबकि जुलाई में इसमें संशोधित 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
इस दौरान बिजली उत्पादन 12.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि खनन एवं संबद्ध क्षेत्र के उत्पादन में 5.6 प्रतिशत की गिरावट आई।
सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र ने लगातार तीसरे महीने आठ प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर्ज की है।
नई श्रृंखला के तहत जारी यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का पांचवां मासिक आंकड़ा है। इस श्रृंखला में औद्योगिक उत्पादन की गणना के लिए थोक कीमतों के बजाय उत्पादक कीमतों का इस्तेमाल किया जाता है।
अगस्त, 2025 में देश का औद्योगिक उत्पादन 4.7 प्रतिशत बढ़ा था। वहीं, इस साल जुलाई के आईआईपी आंकड़े को 6.7 प्रतिशत के अस्थायी अनुमान से संशोधित कर 7.4 प्रतिशत कर दिया गया है।
विनिर्माण क्षेत्र के 23 में से 18 उद्योग समूहों में अगस्त में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की गई। वाहन, विद्युत उपकरण और अन्य परिवहन उपकरणों के उत्पादन में क्रमशः 25.2 प्रतिशत, 30.9 प्रतिशत और 25.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, अगस्त में पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन 16.9 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुओं का 13.7 प्रतिशत और बुनियादी ढांचा एवं निर्माण वस्तुओं का उत्पादन 6.4 प्रतिशत बढ़ा। टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में 11.1 प्रतिशत और गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में 2.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अगस्त के दौरान औद्योगिक उत्पादन 6.7 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में इसमें 4.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि जुलाई एवं अगस्त में आईआईपी की औसत वृद्धि 7.7 प्रतिशत रही, जो पहली तिमाही के औसत 6.2 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण के साथ पूंजीगत, मध्यवर्ती और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं में वृद्धि से औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार व्यापक हुआ है।
हालांकि, देशपांडे ने कहा कि ऊंची लागत, ब्याज दरों और कमजोर वैश्विक मांग के कारण वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में औद्योगिक वृद्धि में नरमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद कच्चे तेल और अन्य औद्योगिक कच्चे माल की बढ़ती लागत से भी कारखाना उत्पादन और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
क्रिसिल के मुताबिक, अगस्त में बिजली उत्पादन भी औद्योगिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण आधार रहा। एजेंसी ने इसके लिए सामान्य से अधिक गर्म मौसम और कम बारिश को भी एक कारण बताया। अगस्त में बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत कम रही।
देशपांडे ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के घटकर सात प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 7.8 प्रतिशत रही थी।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

Facebook


