मध्यस्थता से पहले ठेकेदारों के राशि जमा करने के मुद्दे को न्यायालय ने बड़ी पीठ को भेजा

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मध्यस्थता से पहले ठेकेदारों के राशि जमा करने के मुद्दे को न्यायालय ने बड़ी पीठ को भेजा

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 07:55 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 07:55 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने इस कानूनी सवाल को एक बड़ी पीठ के पास भेज दिया है कि क्या मध्यस्थता शुरू करने से पहले ठेकेदारों से उनके दावे की राशि का एक निश्चित प्रतिशत जमा कराने वाली संविदात्मक शर्तें कानूनी रूप से वैध हैं।

न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सोमवार को कहा कि ऐसी शर्तें पक्षों को मध्यस्थता का सहारा लेने से रोक सकती हैं और मुकदमा करने के अधिकार को निष्प्रभावी बना सकती हैं।

पीठ ने शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि वह एक बड़ी पीठ गठित करने के लिए उपयुक्त निर्देशों हेतु इस मामले को प्रशासनिक स्तर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के समक्ष रखे।

पीठ की ओर से फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, ”इस अदालत का सुविचारित मत है कि ऐसी भारी शर्तें नहीं लगाई जा सकतीं, जो शुरुआत में ही मुकदमा करने के अधिकार को निष्प्रभावी बना दे।”

इस मुद्दे को बड़ी पीठ के पास भेजने का यह निर्देश मेसर्स संतोष एसोसिएट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी) के खिलाफ दायर एक अपील पर आया।

भाषा अजय पाण्डेय

अजय