सांख्यिकी मंत्रालय कोष का अनुकूलतम उपयोग करे, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि की मांगे :: समिति

सांख्यिकी मंत्रालय कोष का अनुकूलतम उपयोग करे, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि की मांगे :: समिति

सांख्यिकी मंत्रालय कोष का अनुकूलतम उपयोग करे, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि की मांगे :: समिति
Modified Date: March 17, 2026 / 03:54 pm IST
Published Date: March 17, 2026 3:54 pm IST

नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने सांख्यिकी मंत्रालय को आवंटित कोष का अनुकूलतम उपयोग सुनिश्चित करने और आवश्यकता पड़ने पर अनुदान मांग के रूप में अतिरक्त कोष प्राप्त करने की सलाह दी है।

वित्त मामलों की संसद की स्थायी समिति ने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की अपनी 35वीं रिपोर्ट… ‘अनुदान मांग (2026-27)’ में मंत्रालय के इस प्रतिवेदन पर गौर किया है कि सांख्यिकी क्षेत्र को मजबूत करने जैसी योजना जैसी विभिन्न योजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बजटीय आवंटन पर्याप्त नहीं है।

समिति ने पाया कि मंत्रालय को केवल 4,522.25 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं जबकि अनुमानित बजटीय मांग 5,826.11 करोड़ रुपये थी।

मंत्रालय ने स्वीकार किया है कि कोष में कटौती से योजना की व्यावहारिकता को खतरा है और इसके रणनीतिक प्रभाव होंगे। इसमें 2026-27 की पहली दो तिमाहियों में आईटी बुनियादी ढांचा (टैबलेट, लैपटॉप) के लिए अग्रिम लागत का वित्तपोषण करने में असमर्थता, क्षेत्र में कार्य के लिए श्रमबल जुटाने में असमर्थता और क्षेत्र में काम करने वाले तथा अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी निदेशालय (डीईएस) के कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण/कार्यशालाओं के आयोजन में कठिनाई शामिल हैं।

समिति ने कहा कि इससे सांख्यिकीय प्रणालियों के डिजिटल बदलाव में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

यह भी बताया गया है कि सांख्यिकी क्षेत्र को मजबूत करने की योजना के पुनर्गठन, आगामी आठवीं आर्थिक जनगणना के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता सृजन जैसी गतिविधियों, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस), घरेलू आय सर्वेक्षण, सीएमएस मॉड्यूल और अखिल भारतीय ऋण एवं निवेश सर्वेक्षण (एआईडीआईएस) सहित कई सर्वेक्षणों के संचालन आदि के कारण अनुमानित बजटीय मांग अधिक थी।

यह देखा गया कि डिजिटल परिवर्तन पहल, ‘डेटा इनोवेशन लैब’ पहल और अन्य विविध खर्चों के लिए भी अनुमानित व्यय में वृद्धि की आवश्यकता थी।

विभिन्न कार्यक्रमों के महत्व को ध्यान में रखते हुए, समिति ने सिफारिश की है कि मंत्रालय अपनी नियोजित कार्यक्रमों को योजना अनुसार आगे बढ़ाए और वर्तमान में आवंटित कोष का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करे।

समिति ने कहा कि यदि भौतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय आवश्यकताएं उत्पन्न होती हैं, तो मंत्रालय अनुदान के लिए पूरक मांगों के माध्यम से अतिरिक्त कोष प्राप्त कर सकता है।

नीति-निर्माण, कार्यान्वयन, निगरानी और अनुसंधान में आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए, समिति ने सिफारिश की है कि मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों से प्रमुख क्षेत्रीय आंकड़ों को समेकित करने वाले एक एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड के विकास और संचालन पर विचार कर सकता है।

रिपोर्ट कहती है कि इस मंच का उद्देश्य सभी के लिए सुलभ, उपयोगकर्ता अनुकूल प्रारूप में प्रामाणिक, सत्यापित और समय-समय पर अद्यतन मानकीकृत आंकड़े उपलब्ध कराना होना चाहिए।

समिति ने उल्लेख किया कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बीच मिशन वात्सल्य के तहत एक राष्ट्रीय बाल सर्वेक्षण आयोजित करने के लिए चर्चा शुरू हो गई है।

समिति ने मंत्रालय से राष्ट्रीय बाल सर्वेक्षण में तेजी लाने और जिलों और राज्यों में बच्चों की स्थिति की निगरानी के लिए एक बाल कल्याण सांख्यिकीय डैशबोर्ड और राष्ट्रीय बाल सूचकांक विकसित करने का आग्रह किया है। साथ ही स्थानीय स्तर पर आंकड़ों के संग्रह को सुविधाजनक बनाने के लिए पंचायतों और स्थानीय निकायों को शामिल करने के लिए राज्य सरकारों के साथ गठजोड़ का सुझाव दिया है।

भाषा रमण अजय

अजय


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