लद्दाख में सी-बकथॉर्न का खरीद मूल्य हुआ दोगुना, अब न्यूनतम 300 रुपये किलो

लद्दाख में सी-बकथॉर्न का खरीद मूल्य हुआ दोगुना, अब न्यूनतम 300 रुपये किलो

लद्दाख में सी-बकथॉर्न का खरीद मूल्य हुआ दोगुना, अब न्यूनतम 300 रुपये किलो
Modified Date: September 18, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: September 18, 2026 9:48 pm IST

लेह, 18 सितंबर (भाषा) लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने शुक्रवार को सी-बकथॉर्न के फलों का न्यूनतम खरीद मूल्य 150 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रति किलोग्राम करने की घोषणा की। इस कदम का उद्देश्य सी-बकथॉर्न का उत्पादन करने वाले किसानों और स्थानीय समुदायों की आय बढ़ाना है।

सक्सेना ने लेह में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सी-बकथॉर्न सम्मेलन के उद्घाटन के दिन यह घोषणा की। उन्होंने लद्दाख के सी-बकथॉर्न पर आधारित विशेष डाक आवरण भी जारी किया।

‘सी-बकथॉर्न’ ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक कांटेदार झाड़ी है। इसके नारंगी-पीले रंग के फलों का इस्तेमाल जूस, खाद्य उत्पादों, सौंदर्य एवं कुछ पारंपरिक उत्पादों में किया जाता है।

अधिकारियों के अनुसार, लद्दाख में सी-बकथॉर्न के प्राकृतिक रूप से घनी और कांटेदार झाड़ियों में उगने से इसके फलों की तुड़ाई मुश्किल होती है। इस कारण सालाना उत्पादन का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है और केवल 15 प्रतिशत का ही व्यावसायिक उपयोग हो पाता है।

सक्सेना ने इस साल फसल के व्यावसायिक उपयोग की दर कम से कम 50 प्रतिशत और अगले साल 100 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आधुनिक तुड़ाई तकनीक अपनाने के साथ बेहतर मूल्यवर्धन, पैकेजिंग और बाजार संपर्क विकसित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि फिलहाल लद्दाख में सी-बकथॉर्न का अधिकांश उत्पादन प्राकृतिक रूप से होता है, जिससे किसानों के लिए इसकी तुड़ाई मुश्किल हो जाती है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसकी व्यवस्थित खेती को बढ़ावा दिया जाएगा और खेती, तुड़ाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग तथा विपणन से जुड़ी पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

सक्सेना ने कहा कि कांटेदार झाड़ियों से फल निकालना श्रमसाध्य और समय लेने वाला है, जिससे बड़ी मात्रा में उपज नष्ट हो जाती है।

उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी आभार जताया, जिन्होंने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सी-बकथॉर्न को ‘संजीवनी’ बताया था। सक्सेना ने कहा कि लद्दाख सी-बकथॉर्न किस्म का जीआई पंजीकरण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी पहचान, प्रामाणिकता और ब्रांड मूल्य स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि लेह जिले के लिए सी-बकथॉर्न को ‘एक जिला, एक उत्पाद’ पहल में शामिल किए जाने से भी इस क्षेत्र को बढ़ावा मिला है।

सक्सेना के अनुरोध पर केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने नुब्रा घाटी में सी-बकथॉर्न के लिए समर्पित ‘राष्ट्रीय संजीवनी अनुसंधान केंद्र’ स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इस केंद्र में सी-बकथॉर्न के शोध, विकास, आनुवंशिक सुधार, प्रसार, तुड़ाई और मूल्यवर्धन से जुड़े काम किए जाएंगे।

अंतरराष्ट्रीय सी-बकथॉर्न सम्मेलन में 20 प्रमुख खरीदारों और करीब 120 एमएसएमई-पंजीकृत उद्यमियों तथा स्वयं सहायता समूहों के अलावा मंगोलिया, वियतनाम और अरुणाचल प्रदेश के तकनीकी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधकर्ता और उद्यमी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन का उद्देश्य सी-बकथॉर्न को आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने से जुड़े अनुभवों और तकनीकी जानकारी का आदान-प्रदान करना है।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम


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