टाइगर ग्लोबल को फ्लिपकार्ट सौदे से हुए पूंजीगत लाभ पर कर देना होगाः न्यायालय
टाइगर ग्लोबल को फ्लिपकार्ट सौदे से हुए पूंजीगत लाभ पर कर देना होगाः न्यायालय
नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को भारतीय राजस्व अधिकारियों के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें अमेरिकी निवेशक फर्म टाइगर ग्लोबल द्वारा वर्ष 2018 में फ्लिपकार्ट से अलग होने पर हुए पूंजीगत लाभ को भारत में कर-योग्य माना गया है।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के अगस्त, 2024 के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें कर मांग को रद्द करते हुए टाइगर ग्लोबल के पक्ष में फैसला दिया गया था।
पीठ ने कहा, “एक बार यह तथ्यात्मक रूप से स्थापित हो जाए कि जिन गैर-सूचीबद्ध शेयरों की बिक्री पर करदाता को पूंजीगत लाभ हुआ, उनका हस्तांतरण कानून के तहत अमान्य व्यवस्था के जरिये किया गया है, तो ऐसे करदाता भारत-मॉरीशस द्विपक्षीय कर संधि के अनुच्छेद 13(4) के तहत कर छूट का दावा करने के हकदार नहीं हैं।”
अक्टूबर 2011 से अप्रैल 2015 के बीच टाइगर ग्लोबल ने फ्लिपकार्ट सिंगापुर के शेयर खरीदे और बाद में अपनी हिस्सेदारी लक्जमबर्ग स्थित इकाई फिट होल्डिंग्स एसएआरएल को स्थानांतरित कर दी।
वर्ष 2018 में अमेरिकी खुदरा दिग्गज वॉलमार्ट इंक के फ्लिपकार्ट में नियंत्रक हिस्सेदारी खरीदने पर टाइगर ग्लोबल इस निवेश से बाहर निकल गया था।
फिर निवेशक फर्म ने फरवरी, 2019 में आयकर विभाग से अग्रिम निर्णय प्राधिकरण से इस मामले पर व्यवस्था मांगी। प्राधिकरण ने अपने फैसले में कहा था कि टाइगर ग्लोबल समूह की संगठनात्मक संरचना दर्शाती है कि संबंधित इकाइयां कर बचाव योजना में केवल मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रही थीं।
प्राधिकरण ने कहा था कि करदाता और उससे जुड़ी कंपनियों का वास्तविक नियंत्रण एवं प्रबंधन टीजीएम एलएलसी के पास था जो अमेरिका में है, न कि मॉरीशस में।
हालांकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह माना था कि टीजीएम एलएलसी केवल एक निवेश प्रबंधक की भूमिका में था और उसे मूल कंपनी नहीं माना जा सकता है।
उच्चतम न्यायालय ने अब उस निर्णय को पलटते हुए राजस्व विभाग के रुख को सही ठहराया है।
इस फैसले पर कानूनी फर्म शार्दुल अमरचंद मंगलदास ने कहा कि यह फैसला उन सभी मौजूदा और पूर्ववर्ती विलय एवं अधिग्रहण सौदों को प्रभावित करेगा, जिनमें कर संधि के लाभ का दावा किया गया है।
फर्म ने कहा, “निजी इक्विटी निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को अपनी निवेश संरचनाओं की समीक्षा करनी होगी और रिटर्न पर पुनर्विचार करना होगा। कर संधि से जुड़े मामलों में कर विवाद बढ़ सकते हैं, जिसका असर कर बीमा बाजार पर भी पड़ेगा। इस फैसले का सूक्ष्म अध्ययन यह स्पष्ट करेगा कि होल्डिंग कंपनी संरचना से जुड़े किन तथ्यों के आधार पर टाइगर ग्लोबल के खिलाफ निर्णय दिया गया।”
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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