नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने शुक्रवार को स्पैम पर अंकुश लगाने के नियमों को कड़ा करते हुए संदिग्ध अवांछित नंबरों की कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित पहचान को नियामकीय दायरे में ला दिया और स्वचालित कॉल एवं रोबोकॉल पर निगरानी बढ़ा दी।
नए नियमों में बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक संचार के लिए इस्तेमाल होने वाली एप्लीकेशन-टू-पर्सन (ए2पी) कॉल पर टर्मिनेशन शुल्क लगाने जैसे निरोधक प्रावधान भी किए गए हैं।
स्पैम ऐसे अनचाहे संदेश या कॉल होते हैं, जो बड़ी संख्या में लोगों को बिना उनकी मांग या सहमति के भेजे जाते हैं।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने कहा कि यदि कॉल प्रबंधन ऐप अपने उपयोगकर्ताओं को अवांछित वाणिज्यिक संचार (यूसीसी) की शिकायत करने की सुविधा देना चाहते हैं, तो उन्हें स्पैम संबंधी जानकारी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ साझा करनी होगी।
नियामक ने कहा कि कॉल प्रबंधन ऐप सेवा एवं लेनदेन संबंधी कॉल के लिए निर्धारित 1600/1601 नंबर शृंखला और विनियमित प्रचारात्मक कॉल के लिए निर्धारित 140 शृंखला को एकमुश्त ढंग से ब्लॉक या टैग नहीं कर सकेंगे।
हालांकि, उपभोक्ता अपने फोन पर कॉल को अपनी इच्छा से ब्लॉक या फिल्टर कर सकेंगे।
संशोधित नियमों में उपभोक्ताओं को स्पैम संबंधी शिकायत के निपटारे के खिलाफ अपील का विकल्प भी दिया गया है। यह अपील शिकायत के निपटान के 15 दिन के भीतर की जा सकेगी।
नए नियमों के मुताबिक, किसी कंपनी के उत्पाद या सेवा के बारे में ग्राहक की सत्यापन-योग्य पूछताछ होने पर अधिकतम सात दिन तक संबंधित वाणिज्यिक संवाद किया जा सकेगा।
ट्राई ने कहा कि यह पूछताछ लिखित या डिजिटल माध्यम से होनी चाहिए और प्रेषक को उसका सत्यापन-योग्य रिकॉर्ड रखना होगा। यह प्रावधान मुख्य रूप से ई-कॉमर्स और ई-सर्विस मंचों के संचार को सुगम बनाने के लिए किया गया है।
नियामक ने संदिग्ध स्पैम के खिलाफ जल्द कार्रवाई के लिए शिकायत आधारित एक नया आधार भी जोड़ा है। अब 10 दिन में तीन या अधिक अलग-अलग शिकायतें मिलने के साथ दूरसंचार कंपनियों की एआई/एमएल प्रणाली द्वारा चिह्नित होने पर संदिग्ध स्पैमर के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जा सकेगी।
दूरसंचार कंपनियों को ऐसे नंबरों की पहचान करनी होगी जिनके अवांछित वाणिज्यिक संचार में इस्तेमाल होने की ‘उच्च संभावना’ हो। उन्हें यह जानकारी अन्य परिचालकों के साथ साझा करनी होगी। दस दिन में ऐसे पांच या अधिक नंबर चिह्नित होने पर आगे जांच और चरणबद्ध कार्रवाई की जा सकेगी। इसमें केवाईसी का दोबारा सत्यापन, भौतिक सत्यापन और बार-बार उल्लंघन के मामलों में दूरसंचार कनेक्शन काटना शामिल है।
ट्राई ने फरवरी 2026 में दूरसंचार कंपनियों को संदिग्ध स्पैम पर कार्रवाई के लिए एआई/एमएल आधारित प्रणाली के इस्तेमाल का निर्देश दिया था। इन प्रावधानों को अब दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम, 2018 (टीसीसीसीपीआर) में शामिल कर दिया गया है।
संशोधित नियमों में ए2पी कॉल को ऐसी वॉयस कॉल के रूप में परिभाषित किया गया है जो किसी ऐप, सॉफ्टवेयर प्रणाली या स्वचालित मंच से बिना किसी व्यक्ति द्वारा सीधे नंबर मिलाए शुरू की जाती है। इसमें ऑटो-डायलिंग, रोबोकॉल और पहले से रिकॉर्ड या कृत्रिम आवाज वाली कॉल शामिल हैं।
ऐसी कॉल के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाता को पहले से जानकारी देना और इस्तेमाल किए जाने वाले नंबरों का विवरण देना अनिवार्य होगा। बिना घोषणा वाली ए2पी कॉल को स्पैम माना जाएगा और उन पर अधिकतम पांच पैसे प्रति मिनट का टर्मिनेशन शुल्क लगाया जाएगा। हालांकि निर्धारित नंबर श्रृंखला या अधिकृत कॉल को इससे छूट होगी।
संशोधित नियम पंजीकृत हेडर (प्रेषक की पहचान बताने वाले नाम/कोड) और सामग्री टेम्पलेट (पहले से पंजीकृत संदेश प्रारूप) के दुरुपयोग पर भी तेजी से कार्रवाई का प्रावधान करते हैं।
यदि किसी टेलीमार्केटर को इसके लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो सभी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर उसके दूरसंचार संसाधनों को एक साल के लिए काटने के साथ उसे काली सूची में डाला जा सकता है।
ट्राई ने कहा कि संशोधनों का उद्देश्य उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना, संबंधित पक्षों की जवाबदेही सुनिश्चित करना और स्पैम के लिए दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग के खिलाफ अधिक प्रभावी तथा समयबद्ध कार्रवाई करना है।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण