दिवाला पेशेवरों के लिए भरोसा सबसे बड़ी पूंजी: कॉरपोरेट मामलों की सचिव

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दिवाला पेशेवरों के लिए भरोसा सबसे बड़ी पूंजी: कॉरपोरेट मामलों की सचिव

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 04:13 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 04:13 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) कॉरपोरेट मामलों की सचिव दीप्ति गौर मुखर्जी ने शनिवार को दिवाला पेशेवरों के लिए आचार संहिता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यदि उनके पास ‘नैतिक आधार’ नहीं होगा तो उनकी वित्तीय समझ बेकार साबित होगी।

उन्होंने कहा कि भरोसा ही इस व्यवस्था की वास्तविक पूंजी है और दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत निर्धारित आचार संहिता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता है।

मुखर्जी राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित स्नातकोत्तर दिवाला कार्यक्रम (पीजीआईपी) के छठे बैच के दीक्षांत समारोह तथा दिवाला सुधारों के एक दशक पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।

स्नातकोत्तर दिवाला कार्यक्रम (पीजीआईपी) भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) द्वारा संचालित किया जाता है।

मुखर्जी ने कहा, “यदि आपके पास नैतिक आधार नहीं है, तो आपकी वित्तीय विशेषज्ञता, बौद्धिक क्षमता और रणनीतिक सोच पूरी तरह बेकार है।”

उन्होंने कहा कि आईबीसी कानून की मूल भावना को बनाए रखना बेहद जरूरी है और इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को कभी भी तथ्यों या आंकड़ों को गलत तरीके से पेश नहीं करना चाहिए।

आईबीसी कानून संकट में फंसी कंपनियों और संपत्तियों के तय समय के भीतर निपटारे के लिए एक मजबूत ढांचा देता है। इसे कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा ही लागू किया जाता है। इस पूरी व्यवस्था में दिवाला पेशेवर एक प्रमुख कड़ी के रूप में काम करते हैं।

भाषा योगेश प्रेम

प्रेम