UPI Payment Charges: डिजिटल पेमेंट पड़ेगा जेब पर भारी? Google Pay, PhonePe, Paytm चलाने वाले सावधान! अब UPI ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज! संसद में आया ये नया बिल
UPI Payment Charges: मंगलवार को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक नया बिल पेश किया है। इस बिल के पास होने के बाद सरकार को UPI और अन्य डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का अधिकार मिल सकता है। इससे भविष्य में डिजिटल लेनदेन के नियमों में बदलाव संभव है।
(UPI Payment Charges/ Image Credit: AI-generated)
- UPI चार्ज को लेकर नया बिल लोकसभा में पेश।
- अभी UPI पेमेंट पर कोई शुल्क लागू नहीं हुआ है।
- सरकार को भविष्य में MDR तय करने का अधिकार मिल सकता है।
नई दिल्ली: UPI Payment Charges: मंगलवार को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026’ पेश किया है। इस बिल के जरिए कई कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्ट्म एक्ट 2007 की धारा 10A में संशोधन की बात भी शामिल है। इसी वजह से UPI, Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच (UPI Payment Charges) यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब UPI ट्रांजैक्शन पर पैसे देने होंगे।
क्या UPI पर तुरंत लग जाएगा चार्ज?
नए बिल को लेकर लोगों में भ्रम है कि कानून बनते ही UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। हालांकि ऐसा नहीं है। अगर यह बिल पास भी हो जाता है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि UPI पर तुरंत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू हो जाएगा। यह सिर्फ सरकार को भविष्य में डिजिटल पेमेंट पर चार्ज से जुड़े फैसले लेने के लिए कानूनी अधिकार देगा।
बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
मौजूदा नियमों के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर चार्ज (UPI Payment Charges) लगाने की अनुमति नहीं है। नए संशोधन के बाद सरकार यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट तरीकों को चार्ज से छूट मिलेगी और किन पर MDR लगाया जा सकता है। यानी अब इस मामले में सरकार नोटिफिकेशन के जरिए फैसला ले सकेगी।
MDR क्या होता है और इसका असर किस पर पड़ता है?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो दुकानदार या व्यापारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर या संबंधित संस्थाओं को देते हैं। यह सीधे ग्राहक के बैंक खाते से कटने वाला चार्ज नहीं होता। अगर भविष्य में MDR लागू होता है तो इसका पहला असर व्यापारियों पर पड़ेगा। हालांकि, कुछ व्यापारी इसका बोझ ग्राहकों पर भी डाल सकते हैं।
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?
UPI भारत का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है। जनवरी 2020 में सरकार ने UPI और कुछ अन्य डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर MDR खत्म (UPI Payment Charges) कर दिया था, ताकि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिल सके। लेकिन लंबे समय तक जीरो MDR व्यवस्था से पेमेंट कंपनियों की कमाई पर असर पड़ा। सरकार फिलहाल इन कंपनियों को इंसेंटिव देती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए स्थायी कमाई का मॉडल जरूरी है।
FM @nsitharaman introduces The Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 in LokSabha.
That the Bill further to amend the Payment and Settlement Systems Act, 2007 and the Income-tax Act, 2025, and to amend the Finance Act, 2026.@nsitharamanoffc… pic.twitter.com/07PNSRPr0T
— SansadTV (@sansad_tv) August 4, 2026
अगर MDR लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
फिलहाल UPI पर कोई चार्ज लगाने का फैसला (UPI Payment Charges) नहीं हुआ है। अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो इसका असर छोटे व्यापारियों, किराना दुकानदारों और डिजिटल पेमेंट इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर पड़ सकता है। इससे कुछ जगहों पर डिस्काउंट कम होने या कीमतों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार को पहले यह तय करना होगा कि कौन से पेमेंट मोड, कितने ट्रांजैक्शन और किस दर पर MDR के दायरे में आएंगे।
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