पश्चिम एशिया संकट के बीच मार्च-मई में यूरिया, डीएपी की बिक्री बढ़ी: उर्वरक सचिव
पश्चिम एशिया संकट के बीच मार्च-मई में यूरिया, डीएपी की बिक्री बढ़ी: उर्वरक सचिव
नयी दिल्ली, 29 मई (भाषा) उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद मार्च-मई की अवधि के दौरान भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों – यूरिया और डीएपी – की बिक्री में पर्याप्त बढ़ोतरी देखी गई। उन्होंने कहा कि खरीफ मौसम की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
यहां दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन दिवस पर आने वाले खरीफ मौसम के लिए उर्वरक की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए, मिश्रा ने कहा कि संघर्ष के बाद यूरिया और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की बिक्री बढ़ गई।
युद्ध के बाद एक मार्च से 25 मई के बीच लगभग 50.59 लाख टन यूरिया बेचा गया, जो पिछले साल की इसी अवधि के 46.01 लाख टन से 4.58 लाख टन ज्यादा है।
यूरिया की यह अतिरिक्त बिक्री मुख्य रूप से महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, असम, छत्तीसगढ़ और झारखंड तक सीमित थी।
सम्मेलन में साझा किए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डीएपी के मामले में एक मार्च से 25 मई के बीच 12.49 लाख टन की बिक्री की गई, जो पिछले साल की इसी अवधि के 8.98 लाख टन से 3.50 लाख टन ज्यादा है।
उर्वरक सचिव ने कहा कि पिछले साल की तुलना में 26 मई तक यूरिया, डीएपी, म्यूरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी), एनपीके और सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
इस साल 26 मई तक यूरिया का भंडार 80.44 लाख टन था, जो पिछले साल की इसी अवधि के 76.31 लाख टन से ज्यादा है। इसी प्रकार, डीएपी का भंडार पहले के 15.14 लाख टन के मुकाबले 21.49 लाख टन, एनपीके का भंडार पहले के 49.95 लाख टन के मुकाबले 58.93 लाख टन और एमओपी का भंडार पहले के 12.36 लाख टन के मुकाबले 13.08 लाख टन था।
एसएसपी का भंडार 26 मई तक थोड़ा घटकर 26.74 लाख टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 27.49 लाख टन था।
उन्होंने बताया कि 26 मई तक कुल उर्वरक स्टॉक 200.68 लाख टन था, जबकि पिछले साल इसी समय यह 181.25 लाख टन था।
मिश्रा ने कहा कि वैश्विक कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच, सरकार घरेलू और आयात, दोनों ही स्रोतों से पर्याप्त उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है।
अब तक लगभग 25 लाख टन यूरिया और 13.50 लाख टन डीएपी का आयात किया जा चुका है।
निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार विदेशों में स्थित अपने 28 दूतावासों के साथ लगातार बातचीत कर रही है।
भाषा राजेश राजेश रमण
रमण

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