नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) अमेरिका ने भारत पर अनुचित सब्सिडी दिए जाने का आरोप लगाते हुए कुछ भारतीय सौर उत्पादों के आयात पर 125.87 प्रतिशत का प्रतिपूर्ति शुल्क लगाने की घोषणा की है।
अमेरिका ने इंडोनेशिया और लाओस से आयातित ‘‘क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक सेल, चाहे वे मॉड्यूल में संयोजित हों या नहीं’’ पर भी अलग-अलग शुल्क दरों की घोषणा की है।
अमेरिकी आदेश के अनुसार, ‘‘24 फरवरी, 2026 को अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत, इंडोनेशिया और लाओ पीपल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक (लाओस) से क्रिस्टलाइन सिलिकॉन फोटोवोल्टिक सेल, चाहे वे मॉड्यूल में संयोजित हों या नहीं (सौर सेल), के संबंध में प्रतिपूर्ति शुल्क जांच में अपने प्रारंभिक निष्कर्षों की घोषणा की।’’
ये शुल्क अमेरिकी प्रशासन द्वारा 24 फरवरी से सभी देशों पर घोषित 10 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त हैं।
आदेश के अनुसार, अमेरिका में भारत से सौर आयात 2022 के 8.38 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 79.26 करोड़ डॉलर हो गया।
आदेश में कहा गया, ‘‘ यदि इसे स्थगित नहीं किया गया, तो इन प्रतिपूर्ति शुल्क (सीवीडी) जांच के अंतिम निर्णय छह जुलाई, 2026 को जारी किए जाएंगे। वाणिज्य विभाग.. भारत, इंडोनेशिया और लाओस से सौर सेल के संबंध में समानांतर रूप से डंपिंग रोधी शुल्क जांच भी कर रहा है।’’
प्रतिपूर्ति शुल्क, कंपनियों को सब्सिडी वाले आयात से बचाने में मदद करते हैं।
भारत, देश में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठा रहा है। इसमें सौर ऊर्जा प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरकर सामने आई है।
भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत के सौर विनिर्माण क्षेत्र में सौर मॉड्यूल, सौर पीवी (फोटो-वोल्टिक) सेल, इन्गोट और वेफर जैसे प्रमुख घटक शामिल हैं। इनका देश के भीतर उत्पादन घरेलू अर्थव्यवस्था को समर्थन देता है और आयात पर निर्भरता कम करता है।
घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘रूफटॉप सोलर’ कार्यक्रम, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना और सीपीएसयू योजना (द्वितीय-चरण) जैसी योजनाओं के तहत आने वाली परियोजनाओं में भारत में निर्मित पैनल एवं सेल का उपयोग अनिवार्य किया है।
आयात को कम करने, स्थानीय विनिर्माण को प्रोत्साहित करने और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने अप्रैल, 2022 में आयातित सौर सेल और मॉड्यूल पर मूल सीमा शुल्क लगाया था।
उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के विनिर्माण के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत देश में लगभग 48.3 गीगावाट की पूर्ण/आंशिक रूप से एकीकृत सौर पीवी मॉड्यूल निर्माण इकाइयों की स्थापना के लिए अनुबंध पत्र जारी किए गए हैं।
इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 26.6 गीगावाट सौर पीवी मॉड्यूल, 10.5 गीगावाट सौर पीवी सेल तथा करीब दो गीगावाट इन्गोट-वेफर विनिर्माण क्षमता स्थापित की जा चुकी है।
इसके अलावा, एक योजना के तहत कुल 39,973 मेगावाट क्षमता वाले 55 सौर पार्क को भी मंजूरी दी गई है।
भारत में सौर मॉड्यूल का आयात 2024-25 में घटकर 2.15 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया जो 2023-24 में 4.35 अरब डॉलर था।
चीन से आयात भी पिछले वित्त वर्ष में घटकर 1.7 अरब डॉलर रह गया, जो 2023-24 में 2.85 अरब डॉलर था। भारत जिन अन्य देशों से आयात करता है उनमें वियतनाम, हांगकांग, मलेशिया और सिंगापुर शामिल हैं।
भाषा निहारिका अजय
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