अमेरिका-भारत करार से उद्योग को कोई राहत नहीं : एएलईएमएआई

अमेरिका-भारत करार से उद्योग को कोई राहत नहीं : एएलईएमएआई

अमेरिका-भारत करार से उद्योग को कोई राहत नहीं : एएलईएमएआई
Modified Date: February 3, 2026 / 07:22 pm IST
Published Date: February 3, 2026 7:22 pm IST

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न मैन्युफैक्चरर्स निकाय ‘एएलईएमएआई’ ने मंगलवार को कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से सिर्फ कुछ खास क्षेत्र को ही फायदा होने की उम्मीद है, जबकि एल्युमिनियम, लोहा और इस्पात उत्पादों के निर्यात पर अमेरिकी बाजार में 50 प्रतिशत ज़्यादा शुल्क लगता रहेगा।

भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत अमेरिका भारतीय सामान पर जवाबी शुल्क को मौजूदा के 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत के बाद यह बात कही।

निर्यातक और विशेषज्ञ अब समझौते की ज़्यादा साफ़ तस्वीर पाने के लिए अमेरिका के कार्यकारी आदेश का इंतज़ार कर रहे हैं।

पिछले साल अगस्त से, भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में 50 प्रतिशत ज़्यादा शुल्क का सामना करना पड़ रहा है।

साथ ही, सेक्शन 232 के तहत एक अलग फैसले के ज़रिये, अमेरिकी प्रशासन ने जून, 2025 से इस्पात, एल्युमिनियम उत्पादों पर शुल्क 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था।

एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (एएलईएमएआई) के अनुसार, जबकि यह बड़ा समझौता दूसरे उद्योगों को राहत देती है, यह फिलहाल ‘इन प्रमुख धातु उद्योग पर ज़्यादा शुल्क का बोझ कम नहीं करता है।

एएलईएमएआई के अध्यक्ष, जितेंद्र चोपड़ा ने कहा, ‘‘..जवाबी शुल्क को 18 प्रतिशत तक कम करने से मुख्य रूप से कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे खास क्षेत्रों को फायदा होगा, लेकिन लोहा, इस्पात और एल्युमिनियम पर आमतौर पर अमेरिकी धारा 232 के तहत 50 प्रतिशत की ज़्यादा शुल्क लगती रहेगी।’’

चोपड़ा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते का अंतिम स्वरूप सामने आना बहुत अच्छी खबर है। जो अनिश्चितता और भ्रम काफी समय से बना हुआ था, वह अब दूर हो जाएगा। इससे व्यापार और उद्योग की दुनिया से ध्यान हटेगा और भारत की विकास यात्रा को और गति मिलेगी।

एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न उद्योग में एल्युमिनियम अयस्क का इस्तेमाल करके उत्पाद बनाने वाली कंपनियाँ शामिल हैं।

व्यापार समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कपड़ा, परिधान, चमड़ा और समुद्री उत्पाद जैसे कई श्रम-गहन क्षेत्र ज़्यादा शुल्क की वजह से चुनौतियों का सामना कर रहे थे।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय


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