(लक्ष्मी देवी ऐरे)
नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) कृषि सचिव अतीश चन्द्रा ने बुधवार को कहा कि कृषि मंत्रालय अल नीनो के संभावित असर को कम करने के लिए ठोस कदम तय करने से पहले इस महीने के अंत तक भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान का इंतजार कर रहा है, ताकि इसके आगमन की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट तस्वीर मिल सके।
चन्द्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘अल नीनो कब शुरू होगा, इसका पूर्वानुमान अभी आना बाकी है। इस महीने के अंत तक आईएमडी अपना आकलन जारी करेगा, जिसके बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। तब तक खरीफ बुवाई का मौसम भी काफी आगे बढ़ चुका होगा और हमें इसकी दिशा का बेहतर अंदाजा हो जाएगा।’’
हालांकि, व्यापक स्तर पर यह अनुमान लगाया गया है कि अल नीनो का प्रभाव नवंबर के आसपास शुरू हो सकता है, लेकिन आईएमडी अंतिम आकलन से पहले अधिक स्पष्टता चाहता है।
उन्होंने कहा कि इस समय एक महत्वपूर्ण कारक हिंद नीनो (आईओडी) है। आईओडी हिंद महासागर के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के बीच समुद्र की सतह के तापमान के अंतर को मापने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना है। यह सीधे तौर पर भारत में मानसून और बारिश के तरीके को प्रभावित करती है।
यह पूछे जाने पर कि मई में सकारात्मक रहने के बाद क्या जून में आईओडी तटस्थ हो गया है, सचिव ने कहा, ‘‘हम इसी पर नजर रख रहे हैं। आईएमडी को अब भी उम्मीद है कि कुछ ऐसे घटनाक्रम हो सकते हैं जो अल नीनो के प्रभाव को कम कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर सकारात्मक आईओडी अल नीनो के प्रभाव को संतुलित करता है, जबकि तटस्थ या नकारात्मक आईओडी मानसून पर उसके प्रभाव को बढ़ा सकता है।
अल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत सहित कई क्षेत्रों में मानसून कमजोर पड़ सकता है।
आईएमडी के अनुसार, वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) के दौरान इसके और मजबूत होने की आशंका है।
मौसम विभाग ने इस वर्ष लगभग 90 प्रतिशत बारिश का अनुमान जताया है, जो सामान्य से कम वर्षा का संकेत देता है।
कृषि सचिव ने कहा कि मानसून फिलहाल अपने निर्धारित समय से चार से पांच दिन पीछे चल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ इसकी आगे की प्रगति में प्रमुख बाधा बना हुआ है। हालांकि, पश्चिम बंगाल के ऊपर बने निम्न दबाव क्षेत्र से पूर्वी दिशा से मानसून को आगे बढ़ने में मदद मिल रही है, जबकि इसका दक्षिणी हिस्सा, जिसके महाराष्ट्र में आगे बढ़ने की उम्मीद थी, अब भी पीछे है।
चंद्रा ने कहा कि तमिलनाडु को छोड़कर, जहां अधिकांश वर्षा लौटते मानसून से होती है, जिन राज्यों में मानसून पहुंच चुका है वहां अच्छी बारिश दर्ज की गई है।
उन्होने कहा कि ऐतिहासिक रूप से अल नीनो का भारत पर गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है। वर्ष 2014-15 इसका एक प्रमुख अपवाद था, लेकिन उस दौरान भी कृषि उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ था।
सचिव ने कहा कि इसके बाद विकसित जलवायु-अनुकूल बीज किस्मों ने कृषि क्षेत्र की प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से निपटने की क्षमता को और मजबूत किया है।
जल प्रबंधन के मोर्चे पर सरकार सूक्ष्म सिंचाई अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अमृत सरोवर योजना के तहत 75,000 तालाबों का पुनरुद्धार किया गया है, ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके।
कृषि सचिव ने आगे कहा, ‘हमारे लिए सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्र नहीं, बल्कि वर्षा आधारित क्षेत्र मुख्य रूप से चिंता का विषय हैं। वैसे, इस साल जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में बेहतर है।’
मुख्य रूप से वर्षा आधारित कृषि पर निर्भर होने के कारण उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, गुजरात, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र सहित 12 राज्यों पर अल नीनो का गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
मंत्रालय ने इन राज्यों के 326 ऐसे जिलों की पहचान की है जहां जोखिम बहुत अधिक है। प्रतिकूल मौसम की स्थिति से निपटने के लिए इन जिलों के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
भाषा योगेश अजय
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