भारत का रणनीतिक भंडार कच्चे तेल के आयात की केवल नौ-10 दिन की जरूरत के बराबर: रिपोर्ट

Ads

भारत का रणनीतिक भंडार कच्चे तेल के आयात की केवल नौ-10 दिन की जरूरत के बराबर: रिपोर्ट

  •  
  • Publish Date - June 17, 2026 / 03:16 PM IST,
    Updated On - June 17, 2026 / 03:16 PM IST

नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) भारत का मौजूदा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार देश के शुद्ध कच्चे तेल आयात की केवल नौ से 10 दिन की आवश्यकता के बराबर है, जो आयात पर निर्भर अन्य प्रमुख देशों की तुलना में काफी कम है। एक रिपोर्ट में बुधवार को यह जानकारी दी गई।

ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद (सीईईडब्ल्यू) की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया कि कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भर अन्य देश, जैसे जापान और दक्षिण कोरिया, 200 दिन से अधिक की जरूरत के बराबर भंडार बनाए रखते हैं।

‘हाउ सिक्योर इज इंडियाज एनर्जी फ्यूचर? असेसिंग एक्सेसिबिलिटी, रिलायबिलिटी एंड अफोर्डेबिलिटी’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के कच्चे तेल के आयात का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रूस और प्रमुख पश्चिम एशियाई देशों सहित केवल छह देशों से आता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इससे आपूर्ति में किसी भी प्रकार के व्यवधान या झटके से निपटने की क्षमता सीमित हो जाती है।

सीईईडब्ल्यू में फेलो हेमंत माल्या ने कहा, ‘‘कच्चे तेल, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), एलपीजी, कोयले या प्रमुख समुद्री परिवहन मार्गों में व्यवधान का असर तेजी से रसोई गैस की लागत, परिवहन ईंधन की कीमतों, उर्वरक सब्सिडी, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, गैस क्षेत्र में भारत अपनी कुल आवश्यकता का लगभग आधा हिस्सा एलएनजी आयात के माध्यम से पूरा करता है, लेकिन देश में गैस के लिए कोई समर्पित रणनीतिक भंडारण सुविधा नहीं है। इससे उर्वरक संयंत्रों और शहरी गैस वितरण नेटवर्क पर जोखिम बढ़ जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्पात उत्पादन के लिए आयातित कोकिंग कोयले, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया से आयात, पर निर्भरता तथा गैर-कोकिंग कोयले के आयात के मामले में इंडोनेशिया की निर्यात नीतियों के प्रति संवेदनशीलता से देश की कोयला सुरक्षा पर भी असर पड़ रहा है।

रिपोर्ट कहती है कि घरेलू स्तर पर कोयले की गुणवत्ता में गिरावट और उत्पादन लागत में वृद्धि से कोयला आधारित बिजली उत्पादन की लागत संबंधी बढ़त स्थिर नवीकरणीय ऊर्जा की तुलना में कम होती जा रही है।

भाषा योगेश अजय

अजय