नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने रविवार को उन महिलाओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके जीवन और सफर को संवारा है।
उन्होंने कहा कि उनकी सफलता की नींव उन मूल्यों और समर्थन पर टिकी है, जो उन्हें अपने परिवार से मिला।
लिंक्डइन पर लिखे एक लेख में अदाणी ने अपनी मां शांताबेन अदाणी के प्रभाव को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे बचपन में मां द्वारा सुनाई गई रामायण जैसे महाकाव्यों की कहानियों ने उनमें साहस, त्याग और कर्तव्य के मूल्यों को स्थापित किया।
उन्होंने कहा कि उन सीखों की गहराई उन्हें तब समझ आई, जब 16 साल की उम्र में उन्होंने अपना करियर बनाने के लिए मुंबई जाने के लिए घर छोड़ा था। अदाणी ने उस मानसिक शक्ति को याद किया जो उनकी मां ने उन्हें एक अनिश्चित भविष्य की ओर कदम बढ़ाने की अनुमति देते समय दिखाई होगी।
अदाणी ने अपनी पत्नी प्रीति अदाणी की भूमिका की भी सराहना की, जिन्होंने दंत चिकित्सा का करियर छोड़कर ‘अदाणी फाउंडेशन’ का नेतृत्व संभाला।
उन्होंने बताया कि ‘अदानी फाउंडेशन’ आज देश के 22 राज्यों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे क्षेत्रों में सक्रिय है और अब तक एक करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला चुका है।
अदाणी ने अपनी बहुओं, परिधि अदाणी (करण अदाणी की पत्नी) और दीवा अदाणी (जीत अदाणी की पत्नी) की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे परिवार में ‘नया दृष्टिकोण और नयी ऊर्जा’ लेकर आई हैं। साथ ही उन्होंने अपनी पोतियों से मिलने वाली खुशी का भी उल्लेख किया।
अपनी व्यावसायिक यात्रा को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भले ही उद्यमी बड़ी कंपनियों और संपत्तियों के निर्माण में दशकों लगा देते हैं, लेकिन इसका अंतिम उद्देश्य अगली पीढ़ी के लिए एक बेहतर भविष्य बनाना होता है।
अदाणी ने कहा, ‘मैं हमेशा दो दुनिया… काम और परिवार के बीच रहा हूं। मैंने अपनी पहली दुनिया में जो कुछ भी बनाया है, वह मुझे दूसरी दुनिया से मिलने वाली ताकत के कारण ही संभव हो पाया है।’
उन्होंने कहा कि जीवन की सबसे मजबूत नींव कंक्रीट या स्टील से नहीं, बल्कि उन लोगों से बनती है जो हमें एक व्यक्तित्व प्रदान करते हैं।
अदाणी ने अपनी मां को संस्कार देने के लिए, पत्नी प्रीति को उनका पथ-प्रदर्शक (विवेक) बनने के लिए, अपनी दोनों बहुओं परिधि और दीवा को परिवार में शक्ति, प्रतिभा और नया दृष्टिकोण लाने के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही उन्होंने अपनी पोतियों का जिक्र करते हुए कहा कि वे हर दिन यह याद दिलाती हैं कि हमारा भविष्य अगली पीढ़ी के योग्य होना चाहिए।
भाषा सुमित रमण
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