दुनिया को अल्पकालिक लाभ से ऊपर उठकर काम करने वाले उद्योग प्रमुखों की जरूरत: नायडू

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दुनिया को अल्पकालिक लाभ से ऊपर उठकर काम करने वाले उद्योग प्रमुखों की जरूरत: नायडू

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  • Publish Date - April 27, 2021 / 04:58 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:34 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि दुनिया को अल्पकालिक लाभ से ऊपर उठकर और दीर्घकालिक स्थिरता की दिशा में काम करने वाले उद्योग तथा व्यवसाय प्रमुखों की आवश्यकता है।

‘इंडियन बी-स्कूल्स लीडरशिप कॉन्क्लेव’ का वीडियो कांफ्रेन्स के जरिये उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने सचेत किया कि हमारा विकास कभी भी पर्यावरण की कीमत पर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने वैश्विक तापतान में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं के आने की दर में हो रही वृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि इसके कारण व्यवसायों पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था और समाज में ‘बिजनेस-स्कूल’ बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं क्योंकि यहां पर भविष्य के प्रबंधकों, नेताओं और नवोन्मेषकों को तैयार और प्रशिक्षित किया जाता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक रूप से प्रासंगिक होना चाहिए और प्रबंधन के युवा छात्रों से आग्रह किया कि वे ग्रामीण भारत की व्यापारिक तथा सामाजिक समस्याओं का अध्ययन करने एवं उनकी पहचान करने के लिए आसपास के गांव जाएं और अपने साथ उसका व्यवहारिक समाधान लेकर आएं।

नायडू ने युवा प्रबंधकों से व्यवसायों के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण करने के लिए एक बड़ा दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा, ‘‘एक बेहतर और खुशहाल दुनिया का निर्माण करने के लिए हमारे बिजनेस स्कूलों की प्राथमिकता उभरते हुए प्रबंधकों में चरित्र का निर्माण करना, मूल्यों का अनुकरण करना और सहानुभूति उत्पन्न करना होना चाहिए।’’

उपराष्ट्रपति ने रोजगार काबिलियत के मुद्दे को उठाते हुए हुए इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2020 का उल्लेख किया। इसमें देश में एमबीए स्नातकों की रोजगार काबिलयत दर को 54 प्रतिशत दर्शाया गया है।

उन्होंने बिनेस स्कूलों से छात्रों का नामांकन और रोजगार काबिलियत के बीच अंतर को पाटने वाले उपायों की दिशा में सोचने का आग्रह किया। उन्होंने इस दिशा में बी-स्कूलों से शिक्षा और उद्योग जगत के बीच बातचीत को बढ़ावा देने का आह्वान किया जिससे छात्रों को वास्तविक जीवन की स्थितियों और प्रायोगिक ज्ञान तक पहुंच प्राप्त हो सके।

भाषा

रमण मनोहर

मनोहर