नई दिल्ली/कोलकाता। TMC Crisis Latest News तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के संकेत मिल रहे हैं। पार्टी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में एक बागी गुट ने दावा किया है कि उसके साथ अब 22 सांसद हैं और वे लोकसभा में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता चाहते हैं। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ा दी है।
TMC Crisis Latest News बागी गुट के सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करने की तैयारी में हैं। उनका उद्देश्य टीएमसी से अलग एक स्वतंत्र संसदीय गुट के रूप में मान्यता प्राप्त करना बताया जा रहा है। काकोली घोष दस्तीदार ने कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में दावा किया कि पहले उनके साथ 20 सांसद थे, लेकिन अब दो और सांसद उनके गुट में शामिल हो गए हैं। हालांकि नए सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
राजनीतिक हलकों में उस दस्तावेज को लेकर भी चर्चा तेज है, जिस पर 19 टीएमसी सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया है। इन सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, सताब्दी रॉय, बापी हल्दार, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, असित माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग और माला रॉय समेत अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सांसद रचना बनर्जी और सायनी घोष के हस्ताक्षर भी अलग से सामने आए हैं। इन सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग गुट को मान्यता देने की मांग किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि पत्र की प्राप्ति और हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बागी गुट ने यह भी संकेत दिया है कि वह केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने के पक्ष में है। यदि ऐसा होता है तो यह केवल टीएमसी के भीतर संगठनात्मक विभाजन नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से बड़ा बदलाव माना जाएगा।
सूत्रों के अनुसार बागी सांसदों की बैठक पहले कोलकाता में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। इस बैठक पर राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी के भी बैठक में शामिल होने की चर्चा रही, हालांकि व्यस्तता के कारण उनके शामिल होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। टीएमसी के कई प्रमुख नेता और सांसद फिलहाल इस कथित बागी गुट का हिस्सा नहीं बताए जा रहे हैं। इनमें अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, किर्ती आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और सज्दा अहमद जैसे नाम शामिल हैं। इन नेताओं के हस्ताक्षर कथित दस्तावेज में नहीं होने से पार्टी के भीतर स्थिति को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
इस बीच टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। हालांकि इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं। बता दें कि लोकसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से टीएमसी के भीतर बढ़ती खींचतान की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में 22 सांसदों के अलग गुट बनाने के दावे ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि पूरे मामले पर टीएमसी नेतृत्व की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष से होने वाली मुलाकात और सांसदों की रणनीति इस राजनीतिक घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।