People of Dallirajrah living in lack of facilities
बालोद। जिलें का सबसे बड़ा नगर दल्लीराजहरा जहां कच्चे लोहे का खदान है और इसी कच्चे लोहे के बदौलत पिछले 50 सालों से भिलाई इस्पात संयंत्र की चिमनिया जल रही है, लेकिन यहाँ सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है। पिछले कई सालो से लोग यहां हॉस्पिटल और कई महत्वपूर्ण सुविधाओं की मांग कर रहे है, लेकिन उन्हे कोई हल नहीं मिल पाया। लोगों की माने तो बीएसपी प्रबंधन भी यहां सुविधा प्रदान करने से हाथ खींच लिया है। बीएसपी द्वारा पूर्व में संचालित लगभग सभी सुविधा बंद हो रही है।
यूं तो दल्लीराजहरा नगर जिले के लिये सबसे बड़ा नगर हैष जिसे लौह नगरी दल्लीराजहरा के नाम से भी जाना जाता है। इस नगर की बसाहट कच्चे लोहे माईन्स पहाड़ी के आसपास है और इसी माईन्स पहाड़ी से निकली कच्चे लोहे की बदौलत भिलाई इस्पात संयत्र की चिमनिया पिछले 50 सालों से जल रही है। बीएसपी के द्वारा लगातार इस माईन्स पहाड़ी से कच्चे लोहे का उत्खनन किया जा रहा है और यह सिलसिला पिछले 50 सालो से चल रहा है। नगरवासियों का माने तो 50 साल पहले यहां की आबादी लगभग सवा लाख थी, जो अब घटकर चालीस हजार के आसपास हो गया है।
पहले बीएसपी के द्वारा यहां ढेरों सुविधाए थी। बीएसपी के द्वारा सात स्कूल और दो अस्पताल का बेहतर ढ़ंग से संचालन किया जाता था, लेकिन समय के साथ साथ ये सारी सुविधाये बंद होते गई। स्कूलो को बंद कर दिया गया। वहीं, बीएसपी द्वारा संचालित अस्पताल में कोई खास सुविधा उपलब्ध नहींं है। अस्पताल संचालन मे बीएसपी गंभीरता नही दिखा रही है। लोगों की माने तो बीएसपी अस्पताल महज रिफर सेंटर बन चुका है। यहां आने वाले ज्यादातर मरीजो को भिलाई स्थित सेक्टर 9 अस्पताल रिफर कर दिया जाता है। बहरहाल उजड़ते इस दल्लीजहरा नगर को बचाने और यहाॅ सुविधाये हासिल करने की कवायद मे यहां के निवासी लगे हुये है, लेकिन उनकी मांग अनुसुनी साबित हो रही है। IBC24 से मोहनदास मानिकपुरी की रिपोर्ट