New Chapter in NCERT. Image Source- IBC24
रायपुरः New Chapter in NCERT आजाद भारत के इतिहास में सियासत के कई दौर रहे, इन्हीं में एक कालखंड है 1975 से 1977 का। जब इंदिरा सरकार ने देश में इमरजेंसी यानि आपातकाल लगा दिया था। इमरजेंसी यानि देश के सभी नागरिकों के ज्यादातर अधिकार सस्पेंड कर दिये गए और विरोध में उठी आवाज दबाने हर मुमकिन कोशिश की गई। अब उसी दौर को मौजूदा सरकार ने बच्चों के सिलेबस, उनकी किताब में शामिल करा दिया है। जाहिर है कांग्रेस को ये जरा भी ठीक नहीं लग रहा। कहा जा रहा है ये सब सियासी साजिश है तो आपातकाल की बरसी पर पुरानी बहस में जुड़े इस नए अध्याय के लिए क्या तर्क हैं, नेताओं के पास?
New Chapter in NCERT 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के एक आदेश पर देश में आपातकाल लगा दिया गया, जिसे देश के इतिहास का काला अध्याय बताते हुए के बीजेपी देश भर में संविधान हत्या दिवस मना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ये संविधान पर सीधा हमला था। याद किया कि कैसे उस दौर में सारे नागरिक अधिकार और आजादी छीनी गई थी। दूसरी तरफ NCERT ने पहली बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में इमरजेंसी का एक खंड जोड़ा दिया है, जिसमें 1975–77 के आपातकाल को भारत में लोकतंत्र के सामने आई बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आपातकाल के बारे में आने वाली पीढ़ी को जानना बेहद जरूरी है।
बीजेपी के आयोजन और किताब में आपातकाल जोड़ने कांग्रेस बिफरी हुई है। PCC प्रभारी सचिन पायलट ने कहा बीजेपी, संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग कर रही है और अब तो वो इतिहास को अपने तरीके से पेश करना चाहती है। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा बेशर्म पार्टी बताते हुए, बच्चों के किताबों पर भी राजनीति करने के आरोप लगाए। राहुल गांधी समेत कांग्रेसी दिग्गज अक्सर संविधान की किताब दिखाकर मौजूदा बीजेपी सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में बीजेपी भी बार-बार याद दिला रही है कि संविधान की असल में हत्या का दौर आपातकाल था जिसकी जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी है। सवाल है कि इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने पर दिक्कत क्यों है, क्या ये जरूरी है या सियासी लाभ के लिए है?