Amit Shah in Bastar || Image- PTI News File and AI Generated File
जगदलपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है। (Amit Shah in Bastar) उन्होंने कहा कि जनवरी 2024 में सरकार ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया था, जिसे अब सुरक्षा बलों की मेहनत से हासिल कर लिया गया है।
जगदलपुर में आयोजित ‘उजर बस्तर’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब सरकार ने बंद कमरे में नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था, तब कई लोगों ने इसे असंभव बताया था। लेकिन अब यह लक्ष्य पूरा हो गया है। उन्होंने सुरक्षा बलों, डीआरजी और कोबरा जवानों की बहादुरी की सराहना की।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नक्सलियों का सफाया करना नहीं था, बल्कि बस्तर के गरीब आदिवासियों तक शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाना भी था। (Amit Shah in Bastar) उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण इस क्षेत्र का विकास रुक गया था। अब सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाएगी।
अमित शाह ने बस्तर में शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर कभी नक्सलियों ने पुलिसकर्मियों की हत्या की थी, आज वहीं आदिवासी कल्याण के लिए सेवा केंद्र बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले 3 हजार नक्सलियों के पुनर्वास की योजना बनाई है, ताकि उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर रोजगार दिया जा सके।
गृह मंत्री ने कहा कि “नियद नेल्लानार” योजना के तहत हर गांव में सस्ती राशन दुकानें, प्राथमिक स्कूल और कॉमन सर्विस सेंटर खोले जा रहे हैं। (Amit Shah in Bastar) साथ ही लोगों को पीने का पानी, आधार कार्ड, राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। हर व्यक्ति को हर महीने 7 किलो चावल भी दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अगले डेढ़ साल में बस्तर के 70 सुरक्षा कैंपों को सेवा केंद्रों में बदला जाएगा। यहां बैंकिंग सुविधा, आधार और राशन कार्ड बनाने की सुविधा और सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही जगह मिलेगा।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्देश है कि नक्सलवाद खत्म होने के बाद भी विकास कार्य रुकने नहीं चाहिए। अगले पांच वर्षों में बस्तर के गांवों को पूरी तरह विकसित और आत्मनिर्भर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति, खेल, भाषा और कला को बढ़ावा देने के लिए “बस्तर ओलंपिक” और “बस्तर पंडुम” जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार मिलकर बस्तर के विकास में कोई कमी नहीं छोड़ेंगी।
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