CG High Court Judgement on Divorce Case: 'धोखेबाज पत्नी को पति से गुजारा भत्ता' पति ने खोला पत्नी के अवैध संबंध का राज, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए लिया बड़ा फैसला / Image: AI Generated
बिलासपुर: CG High Court Judgement on Divorce Case इन दिनों प्रदेश ही नहीं देशभर में घरेलू हिंसा और दहेज प्रथा के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि रोजाना कोर्ट में तलाक के लाखों मामले में दर्ज हो रहे हैं। तलाक के ऐसे ही एक मामले में सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए कहा है कि धोखेबाज पत्नी को पति से गुजारा भत्ता पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट का ये फैसला उन पतियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी जिनके खिलाफ पत्नियों ने तलाक की अर्जी लगाई है और हर महीने हजारों रुपए गुजारा भत्ता दे रहे हैं।
CG High Court Judgement on Divorce Case मिली जानकारी के अनुसार जशपुर की रहने वाली महिला और रायपुर के रहने वाले युवक की 19 अप्रैल 2018 की शादी हुई थी। शादी के कुछ महीने तक तो सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन करीब पांच महीने बाद दोनों के बीच आए दिन विवाद होने लगा। शादी के 8 महीने बाद ही दोनों ने अलग होने का फैसला ले लिया। संबंध विच्छेद होने के बाद पत्नी ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और पति से भारी-भरकम गुजारा भत्ता की डिमांड कर दी।
पत्नी का कहना था कि उसका पति उसके चरित्र पर हमेशा शक करता रहता था और जब भी वह मोबाइल पर किसी से बात करती थी, तो उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। कोर्ट से हर महीने खर्चा बांधने की गुहार लगा रही थी। महिला ने यह भी आरोप लगाया था कि 3 लाख रुपए दहेज की मांग को लेकर उसे इस कदर परेशान किया गया कि उसने तंग आकर गांव के एक तालाब में कूदकर खुदकुशी करने की कोशिश की थी, लेकिन ऐन वक्त पर ग्रामीणों ने उसे देख लिया और उसकी जान बचाई। महिला इन सभी दुखों का हवाला देकर कोर्ट से हर महीने खर्चा बांधने की गुहार लगा रही थी।
यहां तक महिला की कहानी एकदम सही चल रही थी, लेकिन मामले में ट्विस्ट तब आया जब पति ने कोर्ट में पत्नी की करतूतों का राज खोल दिया। पति ने कोर्ट के सामने पत्नी के अवैध संबंधों का राज खोलते हुए कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और बातचीत के लिखित ट्रांसक्रिप्ट पेश किया। लेकिन महिला के वकील ने अदालत में दलील दी कि रायपुर फैमिली कोर्ट ने जिस कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग और बातचीत के लिखित ट्रांसक्रिप्ट को मुख्य आधार बनाकर महिला को धोखेबाजी का दोषी माना है, वह पूरी तरह से फर्जी और अवैध है।
महिला का सीधा आरोप था कि उसके पति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल का इस्तेमाल करके उसकी नकली आवाज तैयार की है। महिला ने दावा किया कि इस डिजिटल सबूत के साथ बड़ी चालाकी से छेड़छाड़ की गई है, जिसके बाद कोर्ट के आदेश पर इस पूरे डिजिटल साक्ष्य की बाकायदा वैज्ञानिक जांच भी कराई गई। आखिरकार, यह पूरी कानूनी लड़ाई बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच के सामने पहुंची। कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की तीखी दलीलें सुनीं, निचली अदालत के सारे रिकॉर्ड्स खंगाले और मामले से जुड़े सभी वैज्ञानिक व डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच की।
जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर हाई कोर्ट ने साफ कह दिया कि रायपुर फैमिली कोर्ट के फैसले में कोई गलती नहीं है और पत्नी के खिलाफ मिले सबूत बिल्कुल पुख्ता हैं। अदालत ने दो टूक शब्दों में बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ किया कि अगर कोई पत्नी अपनी मर्जी से व्यभिचार में रह रही है और दूसरे मर्द से संबंध रखती है, तो कानून के मुताबिक वह अपने पति से किसी भी तरह की वित्तीय सहायता या गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद महिला की पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई और पीड़ित पति को इस प्रताड़ना से मुक्ति मिल गई।