Chhattisgarh High Court Judgment on Rape : ‘हाइमेन सुरक्षित तो रेप नहीं…’, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बलात्कार पर बड़ा फैसला, 7 साल की सजा को किया आधा

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बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20 साल पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए धारा 376 के तहत दी गई सजा को संशोधित कर धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) में बदल दिया। कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर कहा कि मामला तकनीकी रूप से बलात्कार नहीं, बल्कि बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में आता है।

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 10:35 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 10:42 PM IST

Chhattisgarh High Court Judgment on Rape / Image Source : IB24

HIGHLIGHTS
  • हाई कोर्ट ने 20 साल पुराने मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला संशोधित किया।
  • धारा 376 की सजा घटाकर 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) के तहत 3 साल 6 माह की सजा तय।
  • मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर ‘प्रवेश’ साबित न होने पर बदला फैसला।

बिलासपुर: Chhattisgarh High Court Judgment on Rape छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 20 साल पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बलात्कार (Rape) और बलात्कार के प्रयास (Attempt to Rape) के बीच के महीन कानूनी अंतर को स्पष्ट किया है। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए आरोपी की सजा को धारा 376 (रेप) से बदलकर धारा 376/511 (रेप का प्रयास) के तहत निर्धारित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला

यह पूरा मामला साल 2004 का है, जब एक आरोपी ने एक युवती को बहला-फुसलाकर अपने घर ले जाकर उसके साथ जबरदस्ती की और उसे कमरे में बंधक बनाकर उसके हाथ-पैर बांध दिए थे। साल 2005 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने आरोपी को दोषी करार देते हुए धारा 376(1) के तहत 7 साल के कठोर कारावास और धारा 342 के तहत 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने सुनवाई की।

मेडिकल रिपोर्ट में हाइमेन पाया गया था सुरक्षित

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता के बयानों में ‘प्रवेश’ (Penetration) को लेकर विरोधाभास था और मेडिकल रिपोर्ट में भी ‘हाइमेन’ सुरक्षित पाया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालांकि कानूनन बलात्कार के लिए ‘पूर्ण प्रवेश’ अनिवार्य नहीं है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि पूर्ण दुष्कर्म हुआ है। अदालत ने माना कि आरोपी का कृत्य तकनीकी रूप से बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, लेकिन यह स्पष्ट रूप से ‘दुष्कर्म के प्रयास’ का मामला है।

आरोपी की सजा को धारा 376(1) से बदलकर किया धारा 376/511

हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले में संशोधन करते हुए आरोपी की सजा को धारा 376(1) से बदलकर धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) के तहत 3 साल 6 माह कर दिया। Penetration in Rape Law वहीं, बंधक बनाने की सजा (धारा 342) को यथावत रखा गया है और दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट ने आरोपी के जमानत बांड निरस्त करते हुए उसे दो महीने के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का सख्त निर्देश दिया है, अन्यथा पुलिस उसे गिरफ्तार कर शेष सजा पूरी कराएगी। के कारण इसे तकनीकी रूप से बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

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