शह मात The Big Debate: गुटबाजी का शोर.. आरोपों की होड़! टसल और टशन के बीच जंबूरी, क्या बीजेपी के सीनियर नेता खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं? देखें ये वीडियो
गुटबाजी का शोर.. आरोपों की होड़! टसल और टशन के बीच जंबूरी, BJP leaders in Chhattisgarh are accused of factionalism
रायपुरः Chhattisgarh News छत्तीसगढ़ के विपक्ष कुछ हालिया घटनाक्रम को सामने रख सत्तापक्ष के भीतर नेताओं के गुटों मे टकराहट, अंतर्कलह और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है। कांग्रेस कहती है ये अब तो जनता से जुड़े आयोजन कैंसिल कराने तक की नौबत बन रही है तो भाजपा नेता कह रहे हैं जिनके घर शीशे के हों वो आरोपों के पत्थर ना उछालें
क्या छत्तीसगढ़ में सत्तापक्ष में नेताओं के बीच अहम की लड़ाई, विकास कार्यों के आड़े आ रही है? छत्तीसगढ़ कांग्रेस का सोशल मीडिया पोस्ट तो कम से कम यही कहता है। कांग्रेस ने बीजेपी पर गुजबाजी को लेकर जमकर तंज कसा है। दरअसल, बिलासपुर नगर निगम जोन-1,सकरी में 5 जनवरी को, 45 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम था, लाखों खर्च कर भव्य मंच और पंडाल सजा, डिप्टी सीएम और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव मंच पर आने वाले थे लेकिन चंद घंटे पहले कार्यक्रम अचानक रद्द कर दिया गया। ऑफिशियली निगम ने कारण बताया कि, कई विकास कार्य सूचीबद्ध नहीं हो पाए थे, सो कैंसिल करना पड़ा, जबकि चर्चा ये है कि आमंत्रण पत्र में स्थानीय सांसद तोखन साहू, सीनियर विधायक अमर अग्रवाल और धरमलाल कौशिक के नाम ना होने पर केंद्रीय राज्यमंत्री के भारी नाराजगी जताने के बाद इसे स्थगित करना पड़ा।
वैसे ये पहली घटना नहीं है, कुछ ही दिन पहले, राज्य युवा महोत्सव के दौरान पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को फ्रंट रो में कुर्सी ना मिलने पर उपेक्षा के आरोप लगे, हंगामा हुआ। वहीं, बालोद में जंबूरी आयोजन को लेकर भी बीजेपी सांसद बृजमोहन अग्रवाल और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव आमने-सामने दिखते हैं। बालोद जंबूरी पर मीटिंग लेकर स्काउट और गाइड्स छत्तीसगढ़ राज्य परिषद के अध्यक्ष के नाते बृजमोहन अग्रवाल ने जंबूरी को स्थगित कर दिया, कुछ ही देर में खबर का खंडन आ गया और कार्यक्रम को उसी वक्त और स्थान पर होने की जानकारी दी गई, इस मुख्यमंत्री की ओर से पोस्ट कर,उसे हटा दिया गया। कांग्रेस ने इसे कमीशन खोरी के लिए बीजेपी नेताओं की अंदरूनी कलह बताया तो बीजेपी ने ऑल वेल बताते हुए, कांग्रेस को अपना घर संभालने की नसीहत दे रहे हैं।
अब सत्तापक्ष के नेता चाहे लाख सफाई दें लेकिन एक के बाद एक नेताओं का अपनी ही सरकार में शामिल नेताओं पर उपेक्षा के आरोप लगाना, आयोजन के कैंसिल करने पर कलह का सिलसिला विपक्ष के आरोपों को बल दे रहा है। सवाल है कि इन घटनाओं के पीछे बीजेपी में अंतर्कलह है या अहम की लड़ाई?
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