आरक्षण की लड़ाई.. सड़क पर आई! क्या 2023 से पहले आदिवासियों को वापस उनका हक मिल पाएगा?

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क्या 2023 से पहले आदिवासियों को वापस उनका हक मिल पाएगा? BJP leaders took out padyatra till Raj Bhavan, Read

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  • Publish Date - October 15, 2022 / 11:02 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 07:51 PM IST

राजेश राज/रायपुरः आदिवासियों के लिए आरक्षण को यथावत रखने बीजेपी नेताओं ने राजभवन तक पदयात्रा निकाली। भाजपा के 80 नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिला और 32% आरक्षण को फिर से लागू करवाने की मांग की। बीजेपी नेताओ ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। 41 बार हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस सरकार ने मजबूती से तथ्य नहीं पेश किए। नतीजा ये कि 2012 से आदिवासियों को मिल रहा 32% आरक्षण का लाभ इस साल खत्म हो गया।

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दूसरी ओर कांग्रेस भी खुद को आदिवासी हितैषी साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने 5 बिंदुओं पर बीजेपी काल की लापरवाही को सामने रखते हुए उससे जवाब मांगा है। वहीं, मंत्री रविंद्र चौबे ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पदयात्रा में वो दस्तावेज भी लेकर चलें, जो बीजेपी ने अपने शासनकाल में कोर्ट में पेश किये थे।

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प्रदेश की आबादी में 32 फ़ीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले आदिवासी समाज के हित की चिंता दोनों पक्षों के बयानों में है। कोई भी पक्ष इस आदिवासियों से जुड़े आरक्षण के मुद्दे को छोड़ना नहीं चाहता। यहां तीन अहम सवाल हैं कि क्या 2023 से पहले आदिवासियों को वापस उनका हक मिल पाएगा। दूसरा उनकी मौजूदा स्थिति के लिए वो किसे दोषी मानते हैं और तीसरा कौन उन्हें अपना पक्ष या सफाई ज्यादा बेहतर तरीके से समझा पाता है ?