शह मात The Big Debate: ‘बोधघाट’ पर फिर शोर, विरोध का एक और दौर! आदिवासी नेता ने की परियोजना को बंद करने की मांग, क्या एक बार फिर डिरेल हो जाएगा प्रोजेक्ट?

CG Bodhghat Project Update: सीनियर आदिवासी नेता राजाराम तोडेम की मांग है कि बस्तर में बोध घाट परियोजना को बंद कर देना चाहिए।

शह मात The Big Debate: ‘बोधघाट’ पर फिर शोर, विरोध का एक और दौर! आदिवासी नेता ने की परियोजना को बंद करने की मांग, क्या एक बार फिर डिरेल हो जाएगा प्रोजेक्ट?

CG Bodhghat Project Update/Image Credit: IBC24.IN

Modified Date: June 16, 2026 / 11:29 pm IST
Published Date: June 16, 2026 11:29 pm IST
HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ में एक बार फिर बोधघाट परियोजना को लेकर सियासत गरमा गई है।
  • आदिवासी नेता राजाराम तोडेम की मांग है कि बस्तर में बोधघाट परियोजना बंद करने की मांग की है।
  • राजाराम तोडेम ने कहा- आदिवासी समाज बोधघाट परियोजना के पक्ष में नहीं है।

CG Bodhghat Project Update: रायपुर: पूर्व बीजेपी विधायक और सीनियर आदिवासी नेता राजाराम तोडेम की मांग है कि बस्तर में बोध घाट परियोजना को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि आदिवासी समाज इसके पक्ष में नहीं है। अहम बात ये कि ये बयान उस वक्त आया है जब सरकार बस्तर को साल 2030 तक देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लेकर आगे बढना चाहती है।

1979 में शुरू बोध घाट परियोजना को पर्यावरण की मंजूरी के चलते, रोका गया था, जबकि परियोजना का एक तिहाई से अधिक काम पूरा हो चुका था तब कांग्रेस नेता अरविंद नेताम ने इसे बंद कराया था। (CG Bodhghat Project Update) बोध घाट प्रोजेक्ट के पूरे होने पर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जुड़ेंगे, इंद्रावती-महानदी जोड़ने का काम हो सकेगा, करीब 125 से 300 मेगावाट तक हाइड्रो-इलेक्ट्रिक उत्पादन होगा, 4800 टन मत्स्य उत्पादन हो सकेगा, परियोजना पूरी होने पर 3.6 लाख से 8 लाख हेक्टेयर तक भूमि पर सिंचाई पूरी हो सकेगी। अब फिर सरकार बस्तर विकास के लिए प्रोजेक्ट को पूरा करना चाहती हैं, लेकिन आदिवासी समाज दो-टूक कहता हैं कि इससे 56 गांव प्रभावित होगें, वो अपने जंगल की 1 इंच जमीन भी नहीं देंगे।

बोधघाट प्रोजेक्ट’ पर आदिवासियों के विरोध को देखते हुए, बीजेपी सहमति के साथ आगे बढ़ने की बात कह रही है (CG Bodhghat Project Update) तो कांग्रेस आदिवासियों की मांग के साथ जाकर, सरकार पर आरोप लगा रही है।

खास बात ये कि बस्तर से लगे तेलंगाना और ओड़ीसा में ऐसे ही बड़े प्रोजेक्ट विस्तारित हो रहे हैं, लेकिन यहां आदिवासी समाज के विरोध के चलते मामला अटका हुआ है, उस पर भी सत्ता पक्ष से जुड़े आदिवासी नेता भी अब प्रोजेक्ट को बंद करने की बात कहकर मुश्किलें बढ़ाते नजर आ रहे हैं। (CG Bodhghat Project Update) सवाल ये कि क्या सरकार इस प्रोजेक्ट पर आदिवासियों की मांग के साथ जाएगी या आदिवासी अंचल के विकास की जरूरत के साथ ?

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