शह मात The Big Debate: गुस्से में कर्मचारी, असंतोष पड़े न भारी? सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों ने फिर खिलाफ खोला मोर्चा, ई-अटेंडेंस का मसला कैसे सुलझाएगी सरकार?
MP Government Employees News: मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारी और शिक्षकों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस-बीजेपी में जुबानी जंग छिड़ी है।
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MP Government Employees News: भोपाल: मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारी और शिक्षकों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस-बीजेपी में जुबानी जंग छिड़ी है। दरअसल, सरकारी कर्मचारी और शिक्षक एक बार फिर सरकार से नाराज चल रहे हैं। इसके पीछे की तीन बड़ी वजह हैं, पहली प्रदेश के तकरीबन 7 लाख कर्मचारियों के डीए में वृद्धि ना होना। केंद्र ने केंद्रीय कर्मचारियों का DA- 60 फीसदी कर दिया है, लेकिन एमपी में 58 फीसदी DA ही लागू है। दूसरी वजह है शिक्षकों की सैलरी को सीधे ई अटेंडेंस से जोड़ने की पहल, यानी अगर ई-अटेंडेंस नहीं हुई तो शिक्षकों का सैलरी बिल ही जनरेट नहीं होगा और उन्हें वेतन कटौती का सामना करना पड़ेगा। तीसरी वजह है चयनित शिक्षकों की नियुक्ति ना हो पाना, इसके चलते चयनित शिक्षक राजधानी भोपाल में नियुक्ति की मांग को लेकर डटे हैं, हर दिन प्रदर्शन कर रहे हैं। (MP Government Employees News) मामला एकमुश्त वोटबैंक का है ऐसे में सूबे की सियासी तपिश भी बढ़ गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकारें कर्मचारी विरोधी रही हैं। बीजेपी राज में – ई अटेंडेंस को वेतन से जोड़ना, तानाशाही है, नियुक्तियां तक नहीं हो रही।
कांग्रेस का कहना है बीजेपी सरकारें कर्मचारी विरोधी रही है केंद्र सरकार डीए बढ़ा चुकी है,लेकिन मप्र सरकार ने अभी तक डीए नहीं बढ़ाया,ई अटेंडेंस को वेतन से जोड़ना, तानाशाही हिटलरशाही है। वैकेंसी का तो यह हाल है कि परीक्षा हो जाती है लेकिन नियुक्तियां नहीं होती रोज चयनित शिक्षक भोपाल में प्रदर्शन कर रहे है।
इधर कांग्रेस के आरोपों का बीजेपी ने पलटवार करते हुए खुुद को कर्मचारी हितैषी बताया। दावा किया कि बीजेपी की मोहन सरकार कर्मचारियों के हक में फैसले लेती है, (MP Government Employees News) बच्चों के भविष्य के लिए ई-अटेंडेंस जरुरी है..और चयनित शिक्षकों को लेकर भी सरकार जल्द फैसला लेगी।
मध्यप्रदेश सरकार हमेशा केंद्र के बराबर डीए अपने कर्मचारियों को देती है जल्द सरकार यह फैसला करेगी। ई-अटेंडेंस पारदर्शी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए ई-अटेंडेंस जरुरी है। चयनित शिक्षकों की मांगो पर सरकार निर्णय लेगी,कांग्रेस को हमेशा कर्मचारियों ने आईना दिखाया है एमपी के कर्मचारी जानते है बीजेपी सुशासन देने वाली सरकार है।
लेकिन सवाल ये कि मध्यप्रदेश सरकार आर्थिक तौर से सेहतमंद होने के बावजूद कर्मचारियों का डीए क्यों नहीं बढ़ा रही है? (MP Government Employees News) सवाल ये कि शिक्षक – ई-अटेंडेंस के खिलाफ जिद पर क्यों अड़े हुए हैं? सवाल ये भी कि- जिन इलाकों में नेटवर्क की समस्या है, सरकार वहां ई-अटेंडेंस की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं उपलब्ध करा रही? सवाल ये कि-चयनित शिक्षकों को नियुक्ति के लिए क्यों इंतजार कराया जा रहा है?
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