CG High Court: ट्रायल कोर्ट ने दी थी उम्रकैद, हत्या के आरोपी को हाईकोर्ट ने एक झटके में कर दिया बरी, जानिए कैसे पलटा पूरा फैसला

CG High Court: ट्रायल कोर्ट ने दी थी उम्रकैद, हत्या के आरोपी को हाईकोर्ट ने एक झटके में कर दिया बरी, जानिए कैसे पलटा पूरा फैसला

CG High Court: ट्रायल कोर्ट ने दी थी उम्रकैद, हत्या के आरोपी को हाईकोर्ट ने एक झटके में कर दिया बरी, जानिए कैसे पलटा पूरा फैसला

CG High Court/Image- AI Generated

Modified Date: May 15, 2026 / 02:02 pm IST
Published Date: May 15, 2026 1:59 pm IST
HIGHLIGHTS
  • बिलासपुर हाईकोर्ट ने धारा 106 को लेकर दिया महत्वपूर्ण फैसला
  • कोर्ट बोला- केवल आरोपी के चुप रहने से दोष साबित नहीं होता
  • हत्या मामले में उम्रकैद की सजा रद्द कर आरोपी को किया बरी

CG High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ सभी जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों को स्थापित नहीं कर देता, तब तक धारा 106 का लाभ लेकर आरोपी पर जवाब देने का भार नहीं डाला जा सकता। हाईकोर्ट (CG High Court) ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आरोपी के स्पष्टीकरण नहीं देने से दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।

प्रेम संबंध को लेकर विवाद में की थी हत्या

दरअसल, मामला बलौदाबाजार जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2015 में दुश्यंत कुमार ध्रुव की हत्या के मामले में संजय कुमार ध्रुव उर्फ बबलू उर्फ संजू को ट्रायल कोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा (CG High Court) सुनाई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मृतक और आरोपी की बहन के बीच प्रेम संबंध को लेकर विवाद था। इसी रंजिश में आरोपी ने दुश्यंत की हत्या कर दी।

बयान से मुकर गए प्रत्यक्षदर्शी

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट (CG High Court) ने पाया कि जिन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों पर अभियोजन का पूरा मामला टिका था, वे कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए। बरामदगी प्रक्रिया और जब्ती पंचनामा पर भी संदेह सामने आया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित ही नहीं कर पाया कि घटना स्थल पर आरोपी की मौजूदगी निश्चित रूप से थी।

उम्रकैद की सजा निरस्त

डिवीजन बेंच ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित किए बिना धारा 106 का सहारा नहीं लिया जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण मानते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया और हत्या के मामले में सुनाई गई उम्रकैद की सजा को निरस्त करते हुए बरी कर दिया।

 

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लेखक के बारे में

जागेश साहू- 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.