Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,CG High Court/Image- AI Generated
CG High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ सभी जरूरी तथ्यों और परिस्थितियों को स्थापित नहीं कर देता, तब तक धारा 106 का लाभ लेकर आरोपी पर जवाब देने का भार नहीं डाला जा सकता। हाईकोर्ट (CG High Court) ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आरोपी के स्पष्टीकरण नहीं देने से दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।
दरअसल, मामला बलौदाबाजार जिले के भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2015 में दुश्यंत कुमार ध्रुव की हत्या के मामले में संजय कुमार ध्रुव उर्फ बबलू उर्फ संजू को ट्रायल कोर्ट ने दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा (CG High Court) सुनाई थी। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मृतक और आरोपी की बहन के बीच प्रेम संबंध को लेकर विवाद था। इसी रंजिश में आरोपी ने दुश्यंत की हत्या कर दी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट (CG High Court) ने पाया कि जिन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों पर अभियोजन का पूरा मामला टिका था, वे कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए। बरामदगी प्रक्रिया और जब्ती पंचनामा पर भी संदेह सामने आया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित ही नहीं कर पाया कि घटना स्थल पर आरोपी की मौजूदगी निश्चित रूप से थी।
डिवीजन बेंच ने कहा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला स्थापित किए बिना धारा 106 का सहारा नहीं लिया जा सकता। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को त्रुटिपूर्ण मानते हुए आरोपी को संदेह का लाभ दिया और हत्या के मामले में सुनाई गई उम्रकैद की सजा को निरस्त करते हुए बरी कर दिया।