शह मात The Big Debate: राष्ट्रगान, राजगीत, मंत्र..नई व्यवस्था..नया सत्र, इस्लामी कोर्ट ने सरकार के फैसले पर जताई आपत्ति, क्या स्कूलों के परिसर बन जाएंगे सियासी संघर्ष का नया अखाड़ा?

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CG School News: 16 जून से छत्तीसगढ़ में शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए, सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में खास दिनचर्या लागू होगी।

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  • Publish Date - June 13, 2026 / 11:41 PM IST,
    Updated On - June 13, 2026 / 11:43 PM IST

CG School New/Image Credit: IBC24.in

HIGHLIGHTS
  • 16 जून से छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र 2026-27 की शुरुआत होगी।
  • नए शिक्षा सत्र में सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में खास दिनचर्या लागू होगी।
  • सरकार के मुताबिक ये पहल भारतीय संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए है।

CG School News: रायपुर: 16 जून से छत्तीसगढ़ में शुरू हो रहे नए शिक्षा सत्र 2026-27 के लिए, सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में खास दिनचर्या लागू होगी। स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देशों के मुताबिक अब प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के साथ सरस्वती वंदना, गुरु वंदना और गायत्री मंत्र का पाठ कराया जाएगा। इतना ही नहीं, भोजनावकाश के दौरान भोजन मंत्र और छुट्टी के समय छत्तीसगढ़ के राजगीत ‘अरपा पैरी के धार’ का सामूहिक गायन भी अनिवार्य होगा। सरकार के मुताबिक ये पहल भारतीय संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए है।

सरकार का ये फैसला लागू होने से पहले ही विवादों के घेरे में आ गया है। (CG School New) कांग्रेस का आरोप है कि शिक्षा व्यवस्था की खामियों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे उछाले जा रहे हैं। वहीं इस्लामी कोर्ट ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। मौलाना सैय्यद अशरफ जिलानी ने इसे संविधान के अनुच्छेद-25 की भावना के खिलाफ करार दिया।

CG School News: छत्तीसगढ़ की राजनीति में शिक्षा और वैचारिक मुद्दों को लेकर पहले भी टकराव देखने को मिलता रहा है। (CG School New) कांग्रेस लंबे समय से सरस्वती शिशु मंदिरों और उनसे जुड़े पाठ्यक्रमों पर संघ की विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रही है। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग का ये नया आदेश एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस को आमने-सामने ले आया है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या ये पहल बच्चों में संस्कार और अनुशासन का नया अध्याय लिखेगी, या फिर स्कूलों के परिसर सियासी संघर्ष का नया अखाड़ा बन जाएंगे।

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