छत्तीसगढ़ विधानसभा ने मानसून सत्र के पहले दिन पंडवानी कलाकार तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी

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छत्तीसगढ़ विधानसभा ने मानसून सत्र के पहले दिन पंडवानी कलाकार तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 02:35 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 02:35 PM IST

रायपुर, 13 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सोमवार को पंडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान सभी दलों के सदस्यों ने लोक कला और संस्कृति में उनके अहम योगदान को याद किया।

विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र, सदन के अध्यक्ष रमन सिंह द्वारा तीजन बाई के निधन का उल्लेख किए जाने के साथ शुरू हुआ। पांच जुलाई को 70 साल की उम्र में रायपुर के एम्स में तीजन बाई का निधन हो गया था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विपक्ष के नेता चरण दास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्री राजेश अग्रवाल और अन्य सदस्यों ने इस दिग्गज लोक कलाकार को श्रद्धांजलि दी।

उनके निधन को सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने अपनी समृद्ध लोक परंपरा के सबसे बेहतरीन रत्नों में से एक को खो दिया है।

उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी गायन की ‘कापालिक’ शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी असाधारण प्रतिभा से पारंपरिक कहानी कहने की कला के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गायन और अभिनय का उनका अनूठा मेल, किरदारों का जीवंत चित्रण और दमदार कहानी कहने की शैली ने दुनिया भर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

साय ने कहा कि तीजन बाई का जीवन संघर्ष, समर्पण और दृढ़ता का एक प्रेरणादायक उदाहरण था।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब पंडवानी प्रस्तुतियों में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम थी, उन्होंने सामाजिक बाधाओं को तोड़ा और अपनी एक अलग पहचान बनाई, जिससे कलाकारों की आने वाली पीढ़ियां प्रेरित हुईं।

उन्होंने बताया कि उन्होंने एशिया, यूरोप और दुनिया के अन्य हिस्सों के कई देशों में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया, जिससे वैश्विक मंच पर राज्य की सांस्कृतिक पहचान स्थापित करने में मदद मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें पद्म श्री, पद्म भूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2019 में भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ शामिल है।

उन्होंने कहा कि वह छत्तीसगढ़ की एकमात्र ऐसी हस्ती हैं जिन्हें पद्म विभूषण मिला है।

साय ने यह भी याद किया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों ने दिग्गज कलाकार के निधन के बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।

उन्होंने यह भी बताया कि कई विश्वविद्यालयों ने भारतीय लोक संगीत और संस्कृति को बचाने और बढ़ावा देने में तीजन बाई के योगदान को देखते हुए उन्हें डी. लिट. की मानद डिग्री दी है।

विपक्ष के नेता चरण दास महंत ने कहा कि तीजन बाई छत्तीसगढ़ का गौरव हैं और राज्य में शायद ही कोई ऐसा हो जो उनकी कला से परिचित न हो।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनकी असाधारण प्रतिभा को पहचाना था, जिसके चलते उन्हें 1988 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

महंत ने राज्य सरकार से यह भी आग्रह किया कि लोक कलाओं में बेहतरीन काम करने वालों को सम्मानित करने के लिए तीजन बाई के नाम पर एक पुरस्कार शुरू किया जाए।

तीजन बाई को याद करने के बाद उनके सम्मान में सदस्यों ने सदन में दो मिनट मौन रखा। इसके बाद अध्यक्ष रमन सिंह ने कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी।

भाषा संजीव नरेश मनीषा

मनीषा