साइबर सुरक्षा, कृत्रिम मेधा में घरेलू क्षमता विकसित करना जरूरी: आईटी सचिव

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साइबर सुरक्षा, कृत्रिम मेधा में घरेलू क्षमता विकसित करना जरूरी: आईटी सचिव

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  • Publish Date - July 13, 2026 / 04:15 PM IST,
    Updated On - July 13, 2026 / 04:15 PM IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को कहा कि भारत को कृत्रिम मेधा (एआई) और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी घरेलू क्षमता विकसित करनी होगी।

कृष्णन ने कहा कि साइबर खतरों के बढ़ते दायरे और उनकी जटिलता को देखते हुए देश के पास स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण से जीवन और कारोबार सुगम हुआ है तथा आर्थिक दक्षता में सुधार आया है, लेकिन इसके साथ ही कंपनियों और लोगों के सामने साइबर जोखिम भी बढ़े हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता यह है कि कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में भारत अपने मॉडल, डेटा और कंप्यूटिंग अवसंरचना जैसी क्षमताएं स्वयं विकसित करे। इस क्षेत्र में देश के पास घरेलू क्षमता विकसित करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण के लाभ को सुरक्षित रखने के लिए साइबर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आईटी सचिव ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा (बीएफएसआई) और डिजिटल भुगतान क्षेत्र के लिए ‘डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025-26’ का दूसरे संस्करण भी जारी किया।

यह रिपोर्ट वित्तीय संस्थानों, नियामकों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों को बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और डिजिटल भुगतान क्षेत्र के सामने उभरते साइबर खतरों का आकलन उपलब्ध कराती है।

कृष्णन ने कहा कि आज साइबर खतरे कई स्तर पर मौजूद हैं। इनमें व्यक्तियों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराध, संगठनों पर ‘रैनसमवेयर’ हमले और सरकारों तथा राष्ट्रीय अवसंरचना को प्रभावित करने वाले साइबर युद्ध जैसे खतरे शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा का इस्तेमाल साइबर अपराधी अधिक जटिल हमलों के लिए कर रहे हैं।

कृष्णन ने कहा कि साइबर सुरक्षा को केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे संस्थान से जुड़ा जोखिम मानते हुए डिजिटल प्रशासन, कृत्रिम मेधा के नियमन, गोपनीयता और परिचालन के लचीलेपन से जोड़ना होगा।

उन्होंने पहचान और पहुंच प्रबंधन को मजबूत करने, सुरक्षित सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर विकसित करने तथा साइबर हमलों के दौरान भी सेवाएं जारी रखने की क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

रिपोर्ट इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मेइटी), भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन), वित्त क्षेत्र की कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (सीएसआईआरटी-फिन) और साइबर सुरक्षा कंपनी एसआईएसए ने संयुक्त रूप से तैयार की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले संस्करण में भविष्य के जिन सात प्रमुख साइबर खतरों का अनुमान लगाया गया था, उनमें से छह अब पूरी तरह वास्तविकता बन चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि किसी नए साइबर खतरे के उभरने और उसके दुरुपयोग के बीच का समय तेजी से घट रहा है और यह अवधि अब वर्षों के बजाय महीनों या कुछ सप्ताह तक सीमित रह गई है।

एसआईएसए के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी दर्शन शांतमूर्ति ने कहा कि नवोन्मेषण और उसके दुरुपयोग के बीच का अंतर तेजी से कम हो गया है, जिससे साइबर सुरक्षा रणनीतियों में व्यापक बदलाव की जरूरत है।

भाषा योगेश अजय

अजय