मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय चिंतन-प्रशिक्षण शिविर शुरू

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मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय चिंतन-प्रशिक्षण शिविर शुरू

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  • Publish Date - July 4, 2026 / 06:28 PM IST,
    Updated On - July 4, 2026 / 06:28 PM IST

रायपुर, चार जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल का दो दिवसीय चिंतन-प्रशिक्षण शिविर शनिवार से भारतीय प्रबंधन संस्थान रायपुर में शुरू हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि शिविर के पहले दिन मंत्रियों ने नेतृत्व, जीवन-मूल्य, कृत्रिम मेधा (एआई) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लिया।

उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल के सदस्यों के ठहरने की व्यवस्था भी आईआईएम परिसर में ही की गई है, ताकि पूरा शिविर एकाग्र माहौल में संवाद और मंथन का मंच बन सके।

अधिकारियों ने बताया कि विकसित भारत के लक्ष्य के साथ छत्तीसगढ़ भी शासन की अपनी तैयारी को नए ढांचे में ढाल रहा है।

बस्तर में सुरक्षा परिदृश्य बदलने के बाद अब फोकस विकास, निवेश, कृषि, पर्यटन और दूरस्थ इलाकों तक बेहतर पहुंच पर केंद्रित है।

ऐसे में साय सरकार मंत्रिमंडल को नई चुनौतियों और नई अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार करने में जुटी है।

उन्होंने बताया कि चिंतन शिविर के पहले दिन की शुरुआत मोटिवेशनल स्पीकर और आध्यात्मिक गुरु गौर गोपाल दास के सत्र से हुई। उन्होंने मंत्रियों से नेतृत्व, जीवन-मूल्य, आंतरिक संतुलन और सार्वजनिक जीवन में संवेदनशीलता जैसे विषयों पर संवाद किया।

अधिकारियों ने बताया कि शिविर में अभय करंदीकर ने मंत्रिमंडल को एआई, डेटा-आधारित निर्णय और डिजिटल गवर्नेंस की बदलती भूमिका से परिचित कराया।

उन्होंने बताया कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर रमेश चंद ने ग्रामीण आय बढ़ाने, कृषि मूल्य श्रृंखला मजबूत करने, स्थानीय उद्यम को बढ़ावा देने और गांव-केंद्रित विकास की जरूरत पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चिंतन शिविर को बदलते समय की आवश्यकता बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा, ” शासन को निरंतर सीखते रहना होगा, स्वयं का मूल्यांकन करना होगा और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप खुद को तैयार रखना होगा। पहले दिन के सत्रों ने यह संकेत दिया कि छत्तीसगढ़ अब शासन को केवल नियमित प्रशासनिक कवायद के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप एक प्रशिक्षित, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख व्यवस्था के रूप में गढ़ना चाहता है।”

भाषा संजीव संतोष

संतोष