बिलासपुर।Chhattisgarh High Court News: छत्तीसगढ़हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है, कोर्ट का कहना है कि नियुक्ति में उत्तराधिकार का विवाद आड़े नहीं आएगा। कोर्ट ने एसईसीएल प्रबंधन को मृतक महिला कर्मचारी की आश्रित बेटी को नौकरी देने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए अविवाहित बेटी का स्थान सौतेले बेटे से ऊपर है।
जानें पूरा मामला
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा देना है, इसलिए इसे उत्तराधिकार के लंबित मामलों के आधार पर नहीं रोका जा सकता। प्रकरण के अनुसार एसईसीएल की कर्मचारी मंजू का 10 मई 2021 को निधन हो गया था। उसके बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए दो दावेदार सामने आए, एक उनकी अपनी अविवाहित बेटी शकुंतला और दूसरा उनका सौतेला बेटा शिव प्रसाद। एसईसीएल प्रबंधन ने दोनों से एक-दूसरे के खिलाफ अनापत्ति प्रमाण पत्र पेश करने की शर्त रख दी थी। एनओसी न मिलने पर प्रबंधन ने दोनों के आवेदन को निरस्त कर दिया। बेटी व सौतेले बेटे के बीच उत्तराधिकार का विवाद एसईसीएल के आदेश के खिलाफ मृतका की बेटी शकुंतला ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सिंगल बेंच ( Chhattisgarh High Court News) ने अविवाहित बेटी के दावे को प्राथमिकता देते हुए एसईसीएल को 90 दिनों में पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देते हुए मृत कर्मचारी के सौतेले बेटे शिव प्रसाद ने डिवीजन बेंच में याचिका दायर कर कहा कि उत्तराधिकार का मामला कोर्ट में लंबित है, इसलिए अनुकंपा नियुक्ति पर अभी निर्णय नहीं होना चाहिए।
सौतेले बेटे की अपील खारिज
Chhattisgarh High Court News चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सौतेले बेटे की अपील को खारिज करते हुए कहा कि कोयला वेतन समझौते के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए अविवाहित बेटी का स्थान सौतेले बेटे से ऊपर है। अनुकंपा नियुक्ति एक कल्याणकारी उपाय है, जबकि उत्तराधिकार का मामला संपत्ति से जुड़ा होता है। अनुकंपा नियुक्ति के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र का इंतजार करना न्यायोचित नहीं है। कोर्ट ने नाराजगी भी जताई कि जब नीति में प्राथमिकता स्पष्ट है, तो एसईसीएल प्रबंधन द्वारा एनओसी के लिए जिद करना मनमाना और गलत है।