छत्तीसगढ़ शराब ‘घोटाला’: अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जमानत दी

छत्तीसगढ़ शराब ‘घोटाला’: अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को जमानत दी

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  • Publish Date - January 3, 2026 / 12:25 AM IST,
    Updated On - January 3, 2026 / 12:25 AM IST

(तस्वीर के साथ)

रायपुर/बिलासपुर, दो जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राज्य में कथित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में जमानत दे दी।

प्रवर्तन निदेशालय के अधिवक्ता सौरभ कुमार पांडे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज एक मामले और छत्तीसगढ़ भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी)/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडबल्यू) द्वारा दर्ज अन्य मामले में चैतन्य की जमानत याचिकाओं को मंजूर कर लिया।

पांडे बताया कि उच्च न्यायालय ने इस मामले में दलीलें सुनने के बाद 12 दिसंबर, 2025 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और शुक्रवार को इसे सुनाया गया।

ईडी के मामले में दाखिल जमानत याचिका पर उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आवेदक की कथित भूमिका कई वरिष्ठ आरोपियों की तुलना में ‘काफी कम’ थी, जिन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।

इसमें कहा गया कि कथित सरगना और मुख्य लाभार्थी अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, अरुणपति त्रिपाठी और त्रिलोक सिंह ढिल्लों को उच्चतम न्यायालय ने पहले ही जमानत दे दी है, और आवेदक को जमानत न देना समानता के स्थापित सिद्धांत का उल्लंघन होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि जांच काफी हद तक दस्तावेजी प्रकृति की थी और चैतन्य काफी समय तक हिरासत में रहा था। एकल पीठ ने कहा कि ईडी द्वारा एकत्र किए गए सबूतों की जांच, जिसमें धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत बयान और वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं, सुनवाई के दौरान की जाएगी और जमानत के चरण में इसका अंतिम मूल्यांकन नहीं किया जाएगा।

अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि ईडी की इस दलील पर संज्ञान लिया गया कि आवेदक राजनीतिक प्रभाव रखता है, लेकिन गवाहों को डराने या न्याय में बाधा डालने के वास्तविक प्रयासों को दिखाने वाले विशिष्ट सबूतों की अनुपस्थिति में जमानत से इनकार करने का यह अकेला आधार नहीं हो सकता।

एकल पीठ ने कहा, ‘‘आरोपों की गंभीरता, अपने आप में, स्थायी कारावास का औचित्य नहीं बन सकती, खासकर जब न्याय प्रक्रिया में सालों लगने तय हैं।’’

उच्च न्यायालय ने कहा है, ‘‘ईडी द्वारा जिन सबूतों पर भरोसा किया गया है, उनमें आवेदक के नाम पर कोई दस्तावेज़, आधिकारिक संवाद, वित्तीय साधन, बैंक खाता, या संपत्ति का खुलासा नहीं होता है, जो अपराध की कमाई करने में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित करे।”

अदालत ने कहा, ‘‘यह आरोप लगाया गया है कि आवेदक सिंडिकेट के ‘शीर्ष पर’ था, लेकिन यह स्थापित करने के लिए कोई समकालीन दस्तावेजी सबूत रिकॉर्ड पर नहीं रखा गया है जो संकेत करे कि आवेदक का खरीद निर्णयों, कमीशन दरों के निर्धारण, निविदाओं के आवंटन, शराब की ढुलाई या नकदी संग्रह पर नियंत्रण था।’’

एसीबी /ईओडबल्यू मामले में जमानत देते हुए एक अलग आदेश में, उच्च न्यायालय ने इसे ‘‘कानून का गंभीर उल्लंघन’’ बताया कि जांच अधिकारी विशेष न्यायालय द्वारा जारी स्थायी/खुले वारंट के बावजूद लक्ष्मी नारायण बंसल (मामले में एक आरोपी) को गिरफ्तार करने में विफल रहा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में विशेष अदालत ने लक्ष्मी नारायण बंसल के खिलाफ वारंट जारी किया था और यह जांच अधिकारी के पास मौजूद था, इसके बावजूद उन्होंने सह-आरोपी बंसल का केवल बयान रिकॉर्ड किया और उसे भागने दिया, उक्त कृत्य कानून का गंभीर उल्लंघन है।

उच्च न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को इस मामले पर संज्ञान लेने और राज्य भर के पुलिस अधिकारियों को ऐसे उल्लंघनों को दोबारा होने से रोकने के लिए उचित आदेश जारी करने का निर्देश दिया।

उच्च न्यायालय ने साफ किया कि उसकी टिप्पणियां सिर्फ जमानत याचिकाओं के फैसले तक सीमित हैं और इन्हें मामले की खूबियों पर राय नहीं माना जाना चाहिए।

जमानत देते समय न्यायालय ने कुछ शर्तें लगाईं, जिनमें पासपोर्ट, अगर कोई हो, तो उसे जमा कराना होगा और सुनवाई अदालत के समक्ष नियमित रूप से पेश होना होगा और मामले के शीघ्र निपटारे में सहयोग करने का हलफनामा दाखिल करना शामिल हो।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि अगर आरोपी ने सहयोग नहीं किया या शर्तों का उल्लंघन किया गया तो उसकी जमानत रद्द की जा सकती है।

भूपेश बघेल ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे ‘सत्य की जीत’ बताया।

उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान से कहा, ‘सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता। उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। यह बहुत खुशी की बात है कि चैतन्य को जमानत मिल गई है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि चैतन्य को पप्पू बंसल के बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, जो फरार है।

बघेल ने कहा, ‘‘मैं शुरू से ही यह कह रहा हूं कि केंद्र और राज्य सरकारें हमें परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।’’

उन्होंने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को परेशान करने के लिए किया जा रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि लोग अब समझ गए हैं कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जांच एजेंसियों के जरिए विपक्षी पार्टियों को निशाना बनाती है।

भूपेश बघेल ने कहा, ‘‘जो लोग डर जाते हैं, वे उनकी पार्टी में शामिल हो जाते हैं या समझौता कर लेते हैं, जबकि जो ऐसा नहीं करते, उन्हें जेल भेज दिया जाता है। हमारे पूर्वज आजादी की लड़ाई के दौरान जेल गए थे। अगर वे अंग्रेजों से नहीं डरे, तो हम आज उनसे (भाजपा से) क्यों डरें?’’

ईडी ने 18 जुलाई को कथित घोटाले की धनशोधन जांच के सिलसिले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था। इससे पहले, राज्य की एजेंसी ने 24 सितंबर को इस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया था। तब वह पहले से ही जेल में थे।

ईडी के अनुसार, राज्य में शराब ‘घोटाला’ 2019 और 2022 के बीच हुआ था, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।

केंद्रीय जांच एजेंसी के मुताबिक कथित घोटाले से राजकोष को ‘भारी नुकसान’ हुआ और शराब ‘सिंडिकेट’ को लाभ हुआ।

ईडी ने दावा किया था कि चैतन्य कथित शराब घोटाले के पीछे ‘सिंडिकेट’ का मुखिया थे और उन्होंने घोटाले से मिले लगभग एक हजार करोड़ रुपये खुद संभाले थे।

एसीबी/ईओडब्ल्यू ने दावा किया है कि चैतन्य ने उच्च स्तर पर अपराध की कमाई का प्रबंधन करने के साथ-साथ अपने हिस्से के रूप में लगभग 200-250 करोड़ रुपये प्राप्त किए।

राज्य एजेंसी ने दावा किया था कि कथित घोटाले की जांच के दौरान संकेत मिला है कि अपराध की कुल कमाई 3500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

भाषा सं संजीव

धीरज

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