Raigarh Coal Mine Protest
रायपुर: Raigarh Coal Mine Protest बीते 27 दिसंबर को तमनार में जो कुछ हुआ उसमें अब तक बहस थी। सरकार, प्रशासन और पुलिस की भूमिका की। जनता की अनदेखी की, प्रशासन की मिलीभगत की लेकिन अब चर्चा है तमनार कांड में हिंसा, आगजनी और महिला पुलिसकर्मियों से बर्बरता की। ग्रामीण कहते हैं ऐसा बर्ताव वो कर ही नहीं सकते। ये किसी बाहरी का षड़यंत्र है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान उजागर करना शुरू कर दिया है? लेकिन अब सवाल ये है कि क्या तमनार विरोध किसी षड़यंत्र का शिकार हुआ? जनता के गुस्से पर सियासत सवार हुई? सियासी साजिश ने अराजकता की आग लगाई?
Raigarh Coal Mine Protest रायगढ़ के तमनार में नए कोल ब्लॉक की जनसुनवाई के विरोध में बीते 27 दिसंबर को ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन के दौरान की इन दो 2 शर्मनाक तस्वीरों ने प्रशासन और पुलिस से उलट विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों पर ही सवालिया निशान लगा दिया। प्रदर्शन के दौरान एक महिला TI को कुछ लोगों ने पीट-पीट कर लहुलुहान कर दिया, तो एक अन्य महिला आरक्षक के कपड़े फाड़े, घेरकर बुरी तरह पीटा। माहौल इतना अराजक हुआ कि किसी तरह वहशियों से महिला पुलिसकर्मी अपनी जान और मान बचा पाई। जनसुनवाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों की अनदेखी, उनके आक्रोश के बाद अब इन शर्मनाक तस्वीरों पर विपक्ष शासन-प्रशासन को पूरी तरह जिम्मेदार बताकर घेर रहा है।
वहीं, प्रदर्शन के दौरान एक महिला पुलिसकर्मी के कपड़े फाड़ने, लहुलुहान करने जैसी घटना के पीछे सत्तापक्ष उल्टे कांग्रेस पर आरोप लगा रहा है। कैबिनेट मंत्री का दावा है कि ऐसी घटिया हरकत करने वाले ग्रामीण नहीं कांग्रेस समर्थित लोग हैं, ऐसे लोगों पर सख्त एक्शन तय है।
ग्रामीणों का भी मानना है कि विरोध के दौरान महिला पुलिस कर्मियों से बर्बरता करने वाले ग्रामीण नहीं कोई बाहरी तत्व होंगे। फिलहाल फुटेज के आधार पर कुल 4 आरोपियों में से मुख्य आरोपी खरसिया निवासी राजेश मरकाम बताया गया, दो आरोपी गिरफ्तार भी हो चुके हैं।
कुल मिलाकर पहले तमनार में जनभावना की अनदेखी का आरोप लगा। प्रदर्शन को दबाने का आरोप लगा लेकिन 27 तारीख के उग्र प्रदर्शन में पुलिस के साथ झूमाझटकी, आगजनी, मारपीट के साथ-साथ महिला पुलिसकर्मियों से बर्बरता के पीछे अब किन्हीं बाहरी लोगों का हाथ और षड़यंत्र करार दिया जा रहा है। सवाल है अगर ये जानबूझकर, साजिशन किया गया तो इसके पीछे कौन है?