छत्तीसगढ़ : करोड़ों रुपये के सीएसएमसीएल ओवरटाइम घोटाले में सात लोग गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ : करोड़ों रुपये के सीएसएमसीएल ओवरटाइम घोटाले में सात लोग गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ : करोड़ों रुपये के सीएसएमसीएल ओवरटाइम घोटाले में सात लोग गिरफ्तार
Modified Date: May 5, 2026 / 12:11 am IST
Published Date: May 5, 2026 12:11 am IST

रायपुर, चार मई (भाषा) छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण साखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) ने सोमवार को छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) में ओवरटाइम भुगतान में कथित गड़बड़ियों से जुड़े एक मामले में सात लोगों को गिरफ़्तार किया है। अधिकरियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि रायपुर के पूर्व महापौर के भाई और कारोबारी अनवर ढेबर को इस मामले में फरवरी 2026 में गिरफ़्तार किया गया था। ढेबर राज्य में शराब घोटाले समेत कई घोटालों में कथित संलिप्तता के आरोप में न्यायिक हिरासत में हैं।

एसीबी/ईओडब्ल्यू की ओर से जारी बयान के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में ईगल इंटर सॉल्यूशंस लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े वित्त और कर सलाहकार (सीए) नीरज कुमार चौधरी, अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर अजय लोहिया, सुमित फैसिलिटीज़ के डायरेक्टर अजीत दरंदले और अमित प्रभाकर सालुंके, ए टू जेड इंफ्रासर्विसेज लिमिटेड के अध्यक्ष और डायरेक्टर अमित मित्तल तथा प्राइम वन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर राजीव द्विवेदी और संजीव जैन शामिल हैं।

बयान में कहा गया है कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर विशेष अदालत के सामने पेश किया गया। जहां से आरोपियों को 11 मई तक एसीबी/ईओडब्ल्यू की हिरासत में भेज दिया गया।

एसीबी/ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 नवंबर 2023 को तीन व्यक्तियों से 28.80 लाख रूपये जब्त कर आवश्यक कार्रवाई के लिए छत्तीसगढ़ शासन को सूचना दी थी। जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

अधिकारियों ने बताया कि जांच में पाया गया है कि 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम के नाम पर मैन पावर एजेंसियों को लगभग 115 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह रकम मैन पावर एजेंसियों द्वारा अपने कर्मचारियों को भुगतान की जानी थी, लेकिन संबंधित डायरेक्टर्स द्वारा ओवर टाइम के लिए फर्जी बिलों के माध्यम से राशि का आहरण कर उसका उपयोग सीएसएमसीएल के अधिकारियों तथा प्राइवेट व्यक्तियों को कमीशन देने में किया जाता था। इस राशि का बड़ा हिस्सा कंपनियां स्वयं अपने पास रखती थीं।

भाषा

संजीव रवि कांत


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