Reported By: Tehseen Zaidi
,Raipur News | Photo Credit: IBC24
रायपुर: Raipur News गणेशोत्सव को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने विस्तृत गाइडलाइन तैयार कर राज्य सरकार को सौंपी है। संगठन का कहना है कि इन नियमों के पालन से उत्सव न केवल अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित होगा, बल्कि सामाजिक समरसता और पर्यावरणीय संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा।
Raipur News छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन गाइडलाइनों को पूरे प्रदेश में लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पहल जनहितकारी साबित होगी और समाज में शांति, सहयोग तथा अनुशासन की भावना मजबूत होगी।
गाइडलाइन के अनुसार भगवान गणेश की प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) और प्लास्टिक से बनी मूर्तियों की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध होगा। इसका उल्लंघन करने पर नगर पालिका और नगर निगम ऐसे विक्रेताओं पर 10,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाएंगे। साथ ही जब्त मूर्तियों के निस्तारण का खर्च भी उन्हीं विक्रेताओं से वसूला जाएगा। केवल मिट्टी, शिल्पकला और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से बनी मूर्तियों की बिक्री को अनुमति दी जाएगी।
गाइडलाइन में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को नशे की हालत में पंडालों में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा कर्मियों और स्वयंसेवकों को नशे की जांच करने का अधिकार होगा और उल्लंघन करने वालों को पुलिस के हवाले किया जाएगा। पुलिस भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई करेगी। इसी तरह अश्लील गानों और फूहड़ नृत्यों पर भी रोक रहेगी। आयोजन समिति इसके लिए जिम्मेदार होगी और उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
प्रत्येक पंडाल में सीसीटीवी कैमरे और अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य होगा।
गणेश जुलूस या शोभायात्रा में नशे में शामिल होने वालों पर कड़ी रोक होगी। पुलिस किसी भी संदिग्ध व्यक्ति का अल्कोहल टेस्ट कर सकेगी। यदि कोई व्यक्ति नशे की हालत में पाया जाता है तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 355 (सार्वजनिक स्थान पर अनुचित आचरण) के तहत कार्रवाई होगी।
साथ ही अश्लील गाने या फूहड़ नृत्य करने पर आयोजकों के खिलाफ धारा 296 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए समय सीमा और ध्वनि स्तर का पालन अनिवार्य किया गया है।
अनंत चतुर्दशी के दिन ही पूरे प्रदेश में बड़े गणेशजी की मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा। छोटे गणेशजी की मूर्तियों का विसर्जन परंपरा अनुसार किया जा सकता है। विसर्जन केवल प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थानों पर होगा। निर्देशों के अनुसार विसर्जन की शोभायात्रा शाम 6 बजे से शुरू होकर रात 12 बजे तक समाप्त हो जानी चाहिए। आयोजन समिति पर समयसीमा और मर्यादाओं का पालन कराने की जिम्मेदारी होगी।
गाइडलाइन में पुलिस और प्रशासनिक टीम को नियमित गश्त करने और नियमों के पालन की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। वहीं स्वयंसेवक दल को भी सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था में सहयोग करना होगा।
सिविल सोसायटी का मानना है कि इन नियमों के लागू होने से न केवल कानून व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि धार्मिक आयोजनों में अनुशासन और स्वच्छता भी बनी रहेगी। साथ ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक लगेगी।
डॉ. कुलदीप सोलंकी ने कहा कि यदि राज्य सरकार इन गाइडलाइनों को प्रदेशव्यापी स्तर पर लागू करती है तो गणेशोत्सव का आयोजन सुरक्षित, शांतिपूर्ण और जनहितकारी रूप से संपन्न होगा।