गरियाबंद: Gariyaband News: गरियाबंद के गांधी मैदान में 80 वर्षीय बुजुर्ग अहमद बेग इंसाफ की आस में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। मैनपुर निवासी इस बुजुर्ग को उनके ही बड़े बेटे साजिद बेग और बहू परवीन ने उनके घर से निकाल दिया। पहले तहसीलदार ने उन्हें घर का कब्जा दिलवाया था लेकिन हाल ही में बाहर जाने के दौरान बेटे-बहू ने फिर से घर पर कब्जा कर लिया।
Gariyaband News: अब अहमद बेग अपने छोटे बेटे, बहू और बेटी के साथ गांधी मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं, सिर्फ इस उम्मीद में कि प्रशासन एक बार फिर उन्हें उनका आशियाना लौटा देगा।एक बुजुर्ग पिता को उसके ही बेटे द्वारा बेघर कर देना इंसानियत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अहमद बेग की मांग है उन्हें उनका घर वापस मिले और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
Gariyaband News: यह कहानी न केवल अहमद की पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि उस समाज को भी आईना दिखाती है जहां एक बेटा अपने बुजुर्ग पिता के साथ ऐसा घिनौना व्यवहार कर सकता है। क्या जिला प्रशासन अहमद को न्याय दिला पाएगा? यह सवाल अब भी फिजाओं में तैर रहा है।
अहमद बेग, जो कि गरियाबंद जिले के मैनपुर निवासी हैं, अपने बड़े बेटे द्वारा घर से निकाले जाने के विरोध में गांधी मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे प्रशासन से घर लौटाने की मांग कर रहे हैं।
"अहमद बेग का घर कब्जा" किसने किया है?
अहमद बेग के अनुसार, उनके बड़े बेटे साजिद बेग और बहू परवीन ने धोखे से फिर से उनके घर पर कब्जा कर लिया है, जबकि पहले तहसीलदार ने उन्हें कब्जा दिलवाया था।
"गरियाबंद भूख हड़ताल" पर प्रशासन ने क्या कार्रवाई की है?
फिलहाल प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, मामला सुर्खियों में आने के बाद उम्मीद की जा रही है कि जांच कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
क्या "बुजुर्गों के घर पर कब्जे" के मामलों में कानूनी मदद मिल सकती है?
हाँ, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानून उपलब्ध हैं। ऐसे मामलों में तहसील, पुलिस और न्यायालय से मदद ली जा सकती है।
"गांधी मैदान गरियाबंद" में भूख हड़ताल कब से चल रही है?
अहमद बेग अपनी छोटी बहू, बेटे और बेटी के साथ हाल ही में गांधी मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि प्रशासन उन्हें पुनः उनका घर दिलवाए।