रायपुरः किसी मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचना हो या फिर कोई शिकायत या किसी वर्ग की मांग ये सब तब सवालों के घेरे में आ जाता है, जब सत्ता में खुद अपनी ही पार्टी हो। सवाल ये है कि आंतरिक लोकतंत्र का हवाला देने वाले दलों में क्या खुद अपनी ही पार्टी की सरकार में बातें, मांगे, शिकायतें, सुझाव सुने नहीं जाते? क्या संवाद का सीधा द्वार बंद है जो सरकार के मुखिया को, विभाग के मंत्रियों को पत्र लिखकर ध्यान आकर्षित करना पड़ता है? पत्र भी वो जो पब्लिक डोमेन में हैं यानि सार्वजनिक हैं। जाहिर है विपक्ष इसे सत्तासीन बीजेपी के भीतर खींचतान, प्रशासनिक अराजकता और मुद्दों के प्रति उदासीनता बताते हुई घेर रही है तो बीजेपी का दावा है कि असरहीन विपक्ष सामान्य प्रक्रिया को भी खींच-तान कर मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।
बीते 24 घंटे में दो-दो सीनियर नेताओं ने अपनी ही पार्टी की सरकार के मुखिया को खुला पत्र लिखा। प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने CM विष्णुदेव साय को पत्र कोरबा कलेक्टर की शिकायत की। कंवर ने कलेक्टर को हिटलर बताया और 3 दिन में कलेक्टर का तबादला करने अल्टीमेटम दिया, वर्ना अनशन पर बैठने की चेतावनी दी। CM विष्णु देव साय ने जवाब में कहा कि कंवर के आरोप की जांच की जाएगी, फिर कोई फैसला होगा तो पूर्व मंत्री, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य में SET परीक्षा जल्द कराने को लेकर पत्र लिखा, जिसका जवाब दिया, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि बृजमोहन भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, प्रयास है कि जल्द सेट परीक्षा करवाई जाए।
हालांकि, बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के यूं अपनी ही सरकार के मुखिया को लिखे गए पत्र पर कांग्रेस सत्ता पक्ष पर हमलावर है। PCC संचार प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा, देर आए दुरुस्त आए, किसी को तो बेरोजगारों की चिंता हुई। वैसे नेता विपक्ष, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी X-पोस्ट कर भारत के युवाओं की लड़ाई दो मुद्दों पर बताई है। पहला है रोजगार और दूसरा वोट चोरी का। राहुल के इस पोस्ट को प्रदेश के पूर्व डिप्टी CM टीएस बाबा ने री-पोस्ट किया। यानि कांग्रेस युवाओं के रोजगार, उससे जुड़े परीक्षा तंत्र पर सवाल उठाने का मन बना चुकी है। उसपर बीजेपी के सीनियर नेताओं के अपनी सरकार को लिखे गए पत्रों ने विपक्ष को खुला मौका दिया है सवाल उठा कि क्या बीजेपी के राज में सीधे संवाद का क्रम ध्वस्त है ? सवाल ये भी कि क्या बीजेपी नेताओं के पत्र जानबूझकर सार्वजनिक हुए हैं ?