आग बुझाते समय जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को पांच साल का वेतन देंगे ठाणे के दो पार्षद

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आग बुझाते समय जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को पांच साल का वेतन देंगे ठाणे के दो पार्षद

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  • Publish Date - June 20, 2026 / 11:55 AM IST,
    Updated On - June 20, 2026 / 11:55 AM IST

ठाणे, 20 जून (भाषा) ठाणे महानगरपालिका के कम से कम दो पार्षदों ने पिछले महीने एक बाजार में लगी भीषण आग पर काबू पाने के दौरान जान गंवाने वाले दो निगम कर्मचारियों के परिवारों को अगले पांच साल का अपना पूरा वेतन देने का संकल्प लिया है।

शिवसेना के एक नेता ने शुक्रवार को संवाददाताओं को बताया कि महानगरपालिका ने दोनों कर्मचारियों को ‘शहीद’ का दर्जा देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।

शिवसेना के नेता पवन कदम ने कहा कि सदन के नेता हनुमंत जगदाले और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता नजीब मुल्ला ने शोकसंतप्त परिवारों की मदद के लिए पार्षद के रूप में अपने पांच साल के कार्यकाल का पूरा वेतन स्वेच्छा से देने का फैसला किया है।

इस पहल का लाभ अग्निशमन केंद्र अधिकारी सागर शिंदे और सुरक्षा गार्ड कालू गाडेकर के परिवारों को मिलेगा। दोनों की 21 मई को गांवदेवी बाजार में लगी भीषण आग के बाद राहत एवं बचाव अभियान के दौरान मौत हो गई थी। आग में 155 दुकानें जलकर नष्ट हो गई थीं।

कदम ने दावा किया कि शिवसेना के कई अन्य पार्षदों ने भी दोनों परिवारों के कल्याण के लिए अपना वेतन देने की इच्छा जताई है।

इस बीच, कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले दोनों कर्मचारियों को बृहस्पतिवार को हुई महानगरपालिका की आम सभा की बैठक में ‘शहीद’ का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

कदम ने कहा, ‘‘दोनों को यह दर्जा देने के लिए औपचारिक प्रस्ताव 23 जून को होने वाली आम सभा की अगली बैठक में पारित किया जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव औपचारिक रूप से पारित होने के बाद दोनों कर्मचारियों के परिवार, महानगरपालिका द्वारा ‘शहीद’ का दर्जा प्राप्त कर्मियों को दी जाने वाली सभी सुविधाओं और सहायता के हकदार होंगे।

जगदाले ने संवाददाताओं से कहा कि यह फैसला दान नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, ‘‘नागरिकों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करने वालों के साथ शहर के जनप्रतिनिधि होने के नाते खड़ा होना हमारा कर्तव्य है। हमारे कर्मचारी अक्सर खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं और आपात स्थिति में अपनी जान जोखिम में डालते हैं। उनके बलिदान को सम्मान देने की दिशा में यह योगदान एक छोटा-सा प्रयास है।’’

मुल्ला ने एक अलग बयान में कहा कि इस त्रासदी ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया और इसीलिए उन्होंने यह कदम उठाने का फैसला किया।

उन्होंने कहा, ‘‘पांच साल का अपना पूरा वेतन देने का मेरा फैसला केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है। यह सामाजिक जिम्मेदारी और मानवता की भावना को दर्शाता है। इन कर्मचारियों ने ठाणे के लोगों की सेवा करते हुए जो बलिदान दिया है वह हमेशा सम्मान और सहयोग का हकदार है।’’

भाषा

सिम्मी रंजन

रंजन