छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में धर्म परिवर्तन के विवाद पर आदिवासी परिवार को गांव से निकाला

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में धर्म परिवर्तन के विवाद पर आदिवासी परिवार को गांव से निकाला

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में धर्म परिवर्तन के विवाद पर आदिवासी परिवार को गांव से निकाला
Modified Date: June 30, 2026 / 10:18 pm IST
Published Date: June 30, 2026 10:18 pm IST

नारायणपुर, 30 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के एक गांव में कथित धर्म परिवर्तन को लेकर ग्रामीणों ने मंगलवार को एक आदिवासी परिवार को कुछ समय के लिए गांव से बाहर कर दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

हालांकि, परिवार के सदस्यों द्वारा अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताने के बाद उन्हें दोबारा गांव में रहने की अनुमति दे दी गई। पुलिस के मुताबिक यह घटना जिले के खड़कागांव गांव की है।

ग्रामीणों के अनुसार, आदिवासी समुदाय के सदस्य मंटू दुग्गा ने ईसाई धर्म अपना लिया था, जबकि उनके पुत्र मोहन दुग्गा कबीर पंथ का पालन कर रहे थे।

एक ग्रामीण ने दावा किया कि परिवार के प्रति कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं थी, लेकिन उन्होंने गांव की पारंपरिक आदिवासी धार्मिक परंपराओं में भाग लेना बंद कर दिया था।

ग्रामीण ने कहा, ‘‘हमने उनसे कई बार अपनी परंपराओं में लौटने का अनुरोध किया, लेकिन वे तैयार नहीं हुए। वर्षों तक समझाने के बाद ग्रामसभा में इस विषय पर चर्चा हुई और परिवार को गांव से बाहर करने का निर्णय लिया गया।’’

उसने दावा किया कि गांव के करीब 12 परिवार अन्य धर्मों को अपना चुके हैं, लेकिन केवल दुग्गा परिवार को ही गांव से निकाला गया।

एक अन्य ग्रामीण राजमन कुमेटी ने आरोप लगाया कि परिवार को गांव में रहने के लिए जमीन और मकान उपलब्ध कराया गया था, लेकिन मूल आस्था में लौटने के लिए किए गए बार-बार के अनुरोध को उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने बताया कि परिवार का सामान घर से बाहर निकाल दिया गया था, हालांकि मकान को क्षति नहीं पहुंचाई गई।

मोहन दुग्गा ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें गांव में रहने से इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि वह कबीर पंथ का पालन करते हैं, जो 15वीं शताब्दी के संत-कवि कबीर की शिक्षाओं पर आधारित धार्मिक परंपरा है।

इस घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी गांव पहुंचे और ग्रामीणों तथा परिवार के सदस्यों से बातचीत की।

नारायणपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुशील नायक ने बताया कि परिवार ने अपनी मूल आदिवासी आस्था में लौटने पर सहमति जताई, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें गांव में रहने की अनुमति दे दी।

पुलिस के अनुसार विवाद का समाधान हो गया है और गांव में स्थिति शांतिपूर्ण है।

ग्रामीणों ने बताया कि परिवार ने पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए और समुदाय को आश्वासन दिया कि वह आगे भी आदिवासी रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करेगा।

भाषा

सं, संजीव रवि कांत


लेखक के बारे में