Indravati Tiger Reserve: छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व एरिया, पर्यटकों को मिलेगी ये सुविधा, वन विभाग ने शुरू किया काम
Indravati Tiger Reserve: छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व एरिया, पर्यटकों को मिलेगी ये सुविधा, वन विभाग ने शुरू किया काम
- इंद्रावती टाइगर रिज़र्व पहली बार पर्यटकों के लिए खोला जाएगा
- कुटरू–फरसेगुड़ा और भोपालपट्नम मट्टेमरगा से प्रवेश की व्यवस्था होगी
- टाइगर, वनभैंसा, गिद्ध समेत कई वन्यजीव देखने का अवसर मिलेगा
रायपुर: Indravati Tiger Reserve 31 मार्च 2026 के बाद से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म हो चुका है, अब जो गृहमंत्री विजय शर्मा के अनुसार, बस्तर सहित पूरे राज्य से हथियारबंद नक्सली कैडर का सफाया हो चुका है और बचे हुए नक्सली सरेंडर कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ नक्स्लमुक्त होने के बाद अब बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है। दरअसल, 35 साल बाद अब इंद्रावती टाइगर रिजर्व एरिया खुलने जा रहा है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार पर्यटकों के लिए इंद्रावती टाइगर रिजर्व एरिया को खोला जाएगा।
वन विभाग ने शुरू किया काम
Indravati Tiger Reserve छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार होगा जब पर्यटक इंद्रावती टाइगर रिजर्व एरिया के भीतर जाकर प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों की खूबसूरती को निहार सकेंगे। इसके लिए छत्तीसगढ़ के वनविभाग ने पर्यटन प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व एरिया के डिप्टी डायरेक्टर की ओर से बाकायदा टूरिज्म प्लान प्रस्तुत भी कर दिया गया है। इस प्लान के तहत इंद्रावती नदी के किनारे पर्यटन ग्राम विकसित किया जाएगा। उसके पहले जिप्सी के जरिए टूरिस्ट को घुमने का मौका मिलेगा। अभी दो तरफ से एंट्री प्वाइंट तय किया गया है।
एंट्री के लिए होंगे दो रास्ते
वहीं पर्यटकों की एंट्री के लिए कुटरू–फरसेगुड़ा की ओर से एक एंट्री प्वाइंट होगी। वहीं दूसरा एंट्री प्वाइंट भोपालपट्नम मट्टेमरगा की ओर से होगा। इन दोनों जगहों पर गेट बनाए जाएंगे और खास बात यह है कि लोकल लोगों को भी इस प्रोजेक्ट से जोड़ा जाएगा। यहां टूरिस्ट्स को टाइगर, वनभैंसा, गिद्ध समेत कई तरह के वाइल्डलाइफ देखने को मिल सकते हैं।
31 मार्च 2026 तक देशभर के सभी प्रभावित राज्यों को माओवाद से मुक्त
बता दें कि चार दशक पुराने माओवाद के खात्मे का 31 मार्च 2026 आखिरी दिन था। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दो साल पहले ‘लाल आतंक’ के खात्मे की डेडलाइन तय की थी। उन्होंने बताया था कि, राज्यों की पुलिस और केंद्रीय बलों के समन्वय के साथ 31 मार्च 2026 तक देशभर के सभी प्रभावित राज्यों को माओवाद से मुक्त कर दिया जाएगा।
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