Devkinandan Thakur in Raipur: ‘मदरसों को पैसा देती है सरकार, लेकिन मंदिरों को..’ रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर का बड़ा बयान, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर भी कही ये बात

'मदरसों को पैसा देती है सरकार, लेकिन मंदिरों को..' रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर का बड़ा बयान, Kathvachak Devkinandan Thakur in Raipur

Devkinandan Thakur in Raipur: ‘मदरसों को पैसा देती है सरकार, लेकिन मंदिरों को..’ रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर का बड़ा बयान, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर भी कही ये बात

Devkinandan Thakur in Raipur. Image Source- IBC24 Archive

Modified Date: July 13, 2026 / 12:08 am IST
Published Date: July 13, 2026 12:07 am IST

रायपुर। Devkinandan Thakur in Raipur: देश के प्रसिद्ध कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति, धर्म और मूल्यों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी केवल पैसा कमाने तक सीमित होती जा रही है, जबकि उन्हें सही दिशा देना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। वे रविवार को रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे।

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि समाज में पत्रकार, कथाकार और कलाकार ऐसे तीन वर्ग हैं, जो जिस दिशा में आगे बढ़ते हैं, समाज और देश भी उसी दिशा में प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि इन तीनों की भूमिका समाज को सकारात्मक दिशा देने की है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है और नई पीढ़ी अपने धर्म और परंपराओं के प्रति पहले जैसी प्रतिबद्धता नहीं दिखा रही है। उनके अनुसार युवाओं को केवल आर्थिक सफलता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों से भी जुड़ना चाहिए।

सनातन बोर्ड के गठन की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि मंदिरों की आय का समुचित उपयोग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिरों के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और समाजहित में उपयोग सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है। उन्होंने युवाओं से सनातन परंपरा और देशहित के कार्यों में आगे आने का आह्वान भी किया। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि लिव-इन रिलेशन भारतीय संस्कृति और परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्य ही सनातन है और समाज को सत्य एवं नैतिक मूल्यों के मार्ग पर चलना चाहिए।

राम मंदिर से जुड़े चोरी के मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोल रहे हैं तो संभव है कि वह अपनी रणनीति के तहत कार्य कर रहे हों। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि कई अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में बच्चों को भारतीय संस्कृति से दूर करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आधुनिक गुरुकुल जैसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई, जहां विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, संस्कार और भारतीय संस्कृति पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में बच्चों को केवल फिल्मी और विदेशी गीतों पर केंद्रित गतिविधियों में लगाया जाता है, वहां शिक्षा के सांस्कृतिक पक्ष पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए। देवकीनंदन ठाकुर ने यह भी कहा कि संसद और विधानमंडलों में धर्म और संस्कृति से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन के लिए धर्माचार्यों की भागीदारी बढ़नी चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी स्वयं की राजनीति में जाने की कोई इच्छा नहीं है।


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।