Kawardha News: खतरे में बच्चों का भविष्य ..! ऐसे हालातों में संचालित हो रहे शासकीय स्कूल

खतरे में बच्चों का भविष्य ..! ऐसे हालातों में संचालित हो रहे शासकीय स्कूल Government schools are running with the help of hut and bamboo stick

Kawardha News: खतरे में बच्चों का भविष्य ..! ऐसे हालातों में संचालित हो रहे शासकीय स्कूल

Government schools are running with the help of hut and bamboo stick

Modified Date: March 3, 2023 / 07:10 pm IST
Published Date: March 3, 2023 7:09 pm IST

कवर्धा। कबीरधाम जिले का अधिकांश हिस्सा वनांचल क्षेत्र में आता है और वनांचल में विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के लोग निवास करते हैं। जनप्रतिनिधि और अधिकारी द्वारा वनांचल में खासकर शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में भले ही विकास करने का दावा किया जाता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। वनांचल के शासकीय स्कूलों की तस्वीर आज भी झोपड़ी व बांस बल्ली के सहारे संचालित किया जा रहा है। पानी पीने के लिए बच्चे कांवर से पानी ढोते हैं।

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भगवान भरोसे चल रही स्कूल

जिला मुख्यालय से 80 किलोमीटर दूर सुदूर वनांचल के ग्राम पंचायत अमनिया के आश्रित ग्राम डेंगुरजाम में बैगा समुदाय के लगभग दो सौ लोग निवासरत हैं। गांव में एक शासकीय प्राथमिक स्कूल भी संचालित है, लेकिन यह स्कूल भगवान भरोसे चल रही है। स्कूल भवन तो है, लेकिन कक्षा भवन में नहीं बल्कि स्कूल प्रांगण में बनाये गए छोटी सी झोपड़ी में लगाया जाता है, जिसके चारों तरफ दीवार नहीं बल्कि बांस बल्लियों से घेरा बनाया गया है। जहां बैगा समुदाय के 38 बच्चे अपना भविष्य गढ़ रहें हैं। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की माने तो भवन पूरी तरह जर्जर हो गया है बारिश के दिनों में छत का पानी कमरे में टपकता है इसके अलावा भवन पूरी तरह जीर्ण शीर्ण हो चुका है इसलिए यहां संचालित किया जाता है।

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अतिरिक्त कक्ष निर्माण के दावा

ऐसा नहीं है कि यहां सिर्फ स्कूल भवन की कमी है। 38 बच्चों के अध्ययन के लिए यहां एक शिक्षक पदस्थ है, लेकिन सप्ताह में कभी कभार ही स्कूल पहुंचते हैं। बच्चों और ग्रामीणों की माने तो जिस दिन शिक्षक स्कूल नहीं आते उस दिन बच्चे छुट्टी मनाते हैं। यही नहीं स्कूली बच्चे अपनी प्यास बुझाने स्कूल से सौ मीटर दूर हैंड पंप से कांवर के माध्यम पानी ढोते हैं। वहीं इस मामले में डीईओ ने बताया कि स्कूल भवन का निर्माण 2003 में किया गया था। पहुंचविहीन होने के कारण विकास नहीं हो पा रहा है, लेकिन अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए राशि आ चुका है जल्द निर्माण कराने का दावा किया जा रहा है।

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