Sukma News/Image Credit: IBC24.in
Sukma News: सुकमा: बस्तर के सुकमा जिले के कोन्टा ब्लॉक के भेज्जी में 28 वर्ष पहले क्षेत्र के आदिवासियों के रीति रिवाज व संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण अंग वार्षिक मेला सजाया गया था। इस मेले में हज़ारों की संख्या में क्षेत्र के आदिवासी अपने देवी देवताओं के साथ इस मेले का हिस्सा बनने पहुँचे थे। आदिवासियों की आस्था और संस्कृति का महाकुंभ माने जाने वाला यह मेले मड़ई नक्सलियों को नागवार गुज़र गया और नक्सलियों के फ़रमान के बाद सन 1998 के बाद भेज्जी में कोर्राज देव के प्रांगण में लगने वाला मेला पुरी तरह से बंद हो गया। (Sukma News) नक्सलियों का ख़ौफ़ ऐसा की लोग इलाक़े में मेले का नाम लेने से कतराने लगे थे। भेज्जी के ग्रामीण प्रति वर्ष मेला ना लगाते हुए भी नक्सलियों से छिपते छिपाते कोर्राज देव की पूजा अर्चना कर औपचारिकता निभाते रहे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के डेडलाइन और छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से नक्सल मुक्त हुए सुकमा की सबसे सटीक उदाहरण भेज्जी में 28 वर्ष बाद लगा मेला को मान सकते हैं। दरअसल नक्सलियों का प्रभाव ख़त्म हुआ तो लोग अपने अपने देवी देवताओं को लेकर मेले में सामिल होने पहुँचे वर्षों के इंतज़ार के बाद पुनः प्रारंभ हुए मेले से क्षेत्र के ग्रामीणों में ख़ुशी देखी जा रही है। (Sukma News) 138 गाँव के ग्रामीण पहुँचे देवी देवता को लेकर भेज्ज भेज्जी में कोर्राज देव के प्रांगण में क्षेत्र के 138 गावों के हज़ारों के संख्या में ग्रामीण अपने देवी देवता को लेकर इस मेले में पहुँचे हैं जो बिना किसी डर भय के मेले का आनन्द ले रहे हैं और खुलकर कह रहे हैं कि, अब नक्सलवाद का कोई भय नहीं है।
ग़ौरतलब है की कोन्टा ब्लॉक के भेज्जी के क्षेत्र में नक्सलियों का सीधा प्रभाव हुआ करता था। इस इलाके के ग्रामीण नक्सलियों के ख़ौफ़ से अपनी परम्परा और संस्कृति से जुड़े त्योहार भी नहीं मना पाते थे, (Sukma News) लेकिन नक्सल मुक्त होने के बाद क्षेत्र के ग्रामीण इस मेले में सामिल होने पहुँचे हैं और मेले का जमकर आनन्द उठा रहे हैं।
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