Keralam PSC Appointment Case: 18 साल पहले क्रैक किया था PSC एग्जाम, अब मिला अपॉइंटमेंट लेटर.. रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुके थे उम्मीदवार

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Keralam PSC Appointment Case After 18 Years: केरल में अभ्यर्थी को 18 साल बाद नियुक्ति पत्र मिला, तब तक वह सेवानिवृत्ति आयु पार कर चुका था।

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 11:09 PM IST,
    Updated On - June 1, 2026 / 11:23 PM IST

Keralam PSC Appointment Case After 18 Years || Image- AI Generated File

HIGHLIGHTS
  • पीएससी परीक्षा पास करने के 18 साल बाद मिला नियुक्ति पत्र।
  • नियुक्ति मिलने तक उम्मीदवार 60 वर्ष की आयु पार कर चुका था।
  • भर्ती प्रक्रिया में देरी पर प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगे।

मलप्पुरम: केरल में सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के बीच एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। (Keralam PSC Appointment Case After 18 Years) एक उम्मीदवार को लोक सेवा आयोग (PSC) की परीक्षा पास करने के 18 साल बाद नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन तब तक वह सेवानिवृत्ति की उम्र पार कर चुका था।

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यह मामला केरल के मलप्पुरम जिले के कालिकावु क्षेत्र के रहने वाले मूचेक्कल अब्दुल मजीद का है। उन्होंने वर्ष 2005 में पार्ट-टाइम जूनियर लैंग्वेज टीचर (अरबी) पद के लिए केरल पीएससी की परीक्षा दी थी और चयन सूची में भी जगह बनाई थी। इसके बावजूद उन्हें समय पर नियुक्ति नहीं मिल सकी।

तीन साल में खत्म हो गई रैंक सूची

अब्दुल मजीद का नाम जिस रैंक सूची में शामिल था, उसकी वैधता तीन साल तक थी और वह 2008 में समाप्त हो गई। आमतौर पर रैंक सूची की अवधि खत्म होने के बाद उम्मीदवारों की नियुक्ति की उम्मीद भी समाप्त हो जाती है। हालांकि, इस मामले में एक लंबित रिक्त पद को वर्षों बाद फिर से भरने की प्रक्रिया शुरू की गई। (Keralam PSC Appointment Case After 18 Years) इसके बाद त्रिशूर पीएससी कार्यालय ने 26 अप्रैल 2026 को अब्दुल मजीद को नियुक्ति संबंधी सलाह पत्र (एडवाइस मेमो) जारी किया और तीन महीने के भीतर नौकरी जॉइन करने को कहा .लेकिन तब तक सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उनकी उम्र 60 वर्ष हो चुकी थी।

प्रशासनिक लापरवाही का आरोप

अब्दुल मजीद का कहना है कि उन्हें यह नियुक्ति वर्ष 2010 में ही मिल जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि संबंधित पद लंबे समय तक खाली पड़ा रहा और भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी की गई। स्थानीय लोगों ने भी इस मामले को प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा बताया है। उनका कहना है कि यदि समय पर नियुक्ति दी जाती तो मजीद कई वर्षों तक सरकारी सेवा दे सकते थे।

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जन्मतिथि विवाद से मिली नई उम्मीद

मामले में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। अब्दुल मजीद का कहना है कि उनकी एसएसएलसी पुस्तक में जन्मतिथि 27 मई 1966 दर्ज है, जबकि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 27 मई 1967 है। उनका मानना है कि यदि यह त्रुटि सुधारी जाती है तो वह कम से कम एक वर्ष तक सेवा देने के पात्र हो सकते हैं। (Keralam PSC Appointment Case After 18 Years) उन्होंने इस मामले में मानवीय आधार पर राहत देने की मांग करते हुए शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन को आवेदन भेजा है। यह आवेदन राजस्व मंत्री ए. पी. अनिल कुमार के माध्यम से भेजा गया है।

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Q1. अब्दुल मजीद को नियुक्ति पत्र कितने वर्षों बाद मिला?

A. उन्हें पीएससी परीक्षा पास करने के लगभग 18 वर्ष बाद नियुक्ति पत्र मिला।

Q2. नियुक्ति पत्र मिलने के समय उनकी आयु कितनी थी?

A. सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार उनकी आयु 60 वर्ष हो चुकी थी।

Q3. अब्दुल मजीद ने सरकार से क्या मांग की है?

A. उन्होंने जन्मतिथि त्रुटि सुधारकर मानवीय आधार पर सेवा का अवसर देने की मांग की है।