Mahasamund News: ‘मोना के कुत्ते का क्या नाम है’? विकल्पों में दिया ‘राम’ का नाम, DEO के खिलाफ वीएचपी ने की नारेबाजी

Mahasamund News: कक्षा चौथी के पेपर में गाय पर सवाल पूछा गया था। मोना के कुत्ते का क्या नाम है, चार विकल्पों में राम का नाम भी दिया था। इसे लेकर डीईओ के खिलाफ वीएचपी ने प्रदर्शन किया है।

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  • Publish Date - January 7, 2026 / 11:12 PM IST,
    Updated On - January 8, 2026 / 09:21 PM IST
HIGHLIGHTS
  • शिक्षा विभाग का विवादास्पद कारनामा
  • डीईओ के खिलाफ वीएचपी ने प्रदर्शन किया
  • धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले सवाल पर नाराजगी

महासमुंद: Mahasamund News, महासमुंद में विश्व हिन्दू परिषद ने DEO के खिलाफ नारेबाजी की है। साथ ही धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले सवाल पर नाराजगी जताई है। यहां कक्षा चौथी के पेपर में गाय पर सवाल पूछा गया था। मोना के कुत्ते का क्या नाम है, चार विकल्पों में राम का नाम भी दिया था। इसे लेकर डीईओ के खिलाफ वीएचपी ने प्रदर्शन किया है।

शिक्षा विभाग का विवादास्पद कारनामा

महासमुंद जिले में शिक्षा विभाग का विवादास्पद कारनामा सामने आया है। शासकीय स्कूलों में आयोजित कक्षा चौथी की अर्धवार्षिक परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर हिंदू संगठन में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। विश्व हिंदू परिषद ने डीईओ का पुतला दहन कर जमकर नारेबाजी की। वहीं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। सात दिनों के भीतर मांग पूरी नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

“मोना के कुत्ते का क्या नाम है?”

Mahasamund News, मिली जानकारी के मुताबिक, परीक्षा के वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया कि “मोना के कुत्ते का क्या नाम है?”। इस सवाल के चार विकल्पों में भगवान राम का नाम भी शामिल किया गया था। कुत्ते के नाम से जुड़े प्रश्न में भगवान राम का नाम आने से हिंदू संगठन भड़क उठा है और इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।

DEO के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन

इसे लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला दहन किया और शिक्षा विभाग पर लापरवाही एवं असंवेदनशीलता का आरोप लगाया। विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि छोटी कक्षा के बच्चों की परीक्षा में इस तरह के प्रश्न न केवल अनुचित है, बल्कि समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले भी हैं। संगठन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं पूरे मामले में अब तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। शिक्षा विभाग की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

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