kisan suicide news/ image source: IBC24
मानपुर: छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले से सामने आए किसान आत्महत्या के मामले काफी तूल पकड़ रहा है। एक किसान द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने के बाद कांग्रेस और प्रशासन की ओर से इस घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। जहां कांग्रेस ने इसे धान खरीदी व्यवस्था की विफलता बताया है, वहीं प्रशासन ने आत्महत्या के पीछे मानसिक तनाव और आर्थिक दबाव को कारण बताया है।
इस मामले में कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि किसान धान खरीदी केंद्र में धान नहीं लिए जाने से बेहद परेशान था। किसान का टोकन कटने के बावजूद जब खरीदी केंद्र पर धान लेने से मना कर दिया गया, तो वह मानसिक रूप से टूट गया और इसी कारण उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि धान खरीदी व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए और धान खरीदी की तारीख बढ़ाई जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
वहीं दूसरी ओर, प्रशासन ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, किसान ने धान खरीदी के कारण नहीं बल्कि मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या की है। पुलिस द्वारा किए गए पंचनामे और जांच में सामने आया है कि किसान ट्रैक्टर की किस्त नहीं चुका पाने के कारण लंबे समय से तनाव में था। प्रशासन का कहना है कि आत्महत्या का धान बेचने या धान खरीदी केंद्र से कोई सीधा संबंध नहीं है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि किसान एमएमसी (MMC) का निवासी था और उसने वहां लगभग 3 लाख रुपये का धान पहले ही बेच दिया था। इसके अलावा, जिस व्यक्ति ने किसान का धान बोया था, उसने खेत की मालिक किसान की मां को 60 हजार रुपये पहले ही दे दिए थे। खेत किसान की मां के नाम पंजीकृत था और भुगतान भी उन्हीं को किया गया था। यह जानकारी वीडियो बयान और पुलिस पंचनामे में भी दर्ज है। प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया है कि, किसान को शराब की लत थी।
पुलिस के अनुसार, किसान के भाई ने इस संबंध में लिखित बयान दिया है, जिसमें आत्महत्या को धान खरीदी से जोड़ने से इनकार किया गया है। पंचनामे में गांव के सरपंच और अन्य ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, जिससे प्रशासन अपने दावे को मजबूत बता रहा है। इसके साथ ही मृत्यु पंचनामे में यह भी उल्लेख है कि किसान नियमित रूप से शराब का सेवन करता था और मानसिक तनाव में रहता था।
प्रशासन ने यह भी बताया कि किसान 19 तारीख को दोपहर करीब 12 बजे एमएमसी में अपने घर से निकला था, जबकि आत्महत्या की पुष्टि शाम के समय हुई। ऐसे में प्रशासन का कहना है कि किसी तात्कालिक धान खरीदी संबंधी घटना और आत्महत्या के बीच प्रत्यक्ष कारण परिणाम का संबंध स्थापित नहीं होता।