पटोले ने जाति जनगणना प्रश्नावली में बदलाव की मांग की, खुले प्रारूप पर जताई आपत्ति

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पटोले ने जाति जनगणना प्रश्नावली में बदलाव की मांग की, खुले प्रारूप पर जताई आपत्ति

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  • Publish Date - September 6, 2026 / 08:37 PM IST,
    Updated On - September 6, 2026 / 08:37 PM IST

रायपुर, छह सितंबर (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने रविवार को केंद्र सरकार से प्रस्तावित जनगणना प्रश्नावली को वापस लेने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इसमें खुला प्रारूप रखा गया है और सत्यापित जातियों की सूची के लिए कोई विकल्प नहीं दिया गया है, जिससे पिछड़े वर्गों की गणना प्रभावित होगी।

कांग्रेस की छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष दीपक बैज के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पटोले ने कहा कि फरवरी 2027 में प्रस्तावित जनगणना शुरू होने से पहले केंद्र सरकार के पास प्रश्नावली की खामियों को दूर करने का समय है। उन्होंने कहा कि इसके लिए राजनीतिक दलों और सामाजिक विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस देशभर में पारदर्शी तरीके से जाति जनगणना कराए जाने की पक्षधर है। इसके लिए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त जातियों की सूची वाले विकल्प का इस्तेमाल किया जाना चाहिए जैसा कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई प्रक्रिया में किया गया।

कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष पटोले ने आगामी जनगणना के लिए जारी 40 सवालों में से खासतौर पर सवाल संख्या 10 पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका खुला प्रारूप होने के कारण सही तरीके से गणना करना मुश्किल होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘सत्यापित सूची से गणना करने वालों को पहले से तय और सत्यापित जातियों की सूची मिलती है, जिससे वे उचित श्रेणी का चयन कर सकते हैं। लेकिन खुले प्रारूप में गणना करने वाले नागरिकों द्वारा बताई गई जाति या उपजाति को दर्ज करते हैं, जिसमें वर्तनी में अंतर जैसी विविधताएं भी शामिल हो सकती हैं।’’

पटोले ने दावा किया कि एक ही जाति के लिए अलग-अलग नाम, उपजातियां, क्षेत्रीय बोलियां और वर्तनी में अंतर होने से आंकड़ों में विसंगतियां आ सकती हैं और अंतिम आंकड़े भरोसेमंद नहीं रह जाएंगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रश्नावली में ‘‘पिछड़ा वर्ग’’ शब्द को शामिल नहीं किया गया है, जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और अन्य वंचित समुदायों की सही गणना प्रभावित हो सकती है।

पटोले ने आगाह किया कि गलत आंकड़े आनुपातिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को सीधे प्रभावित करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे आरक्षण नीतियों, छात्रवृत्तियों, कौशल विकास कार्यक्रमों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के प्रावधानों के सही क्रियान्वयन और समीक्षा पर असर पड़ेगा।

भाषा आशीष नरेश

नरेश